संगम की पावन रेती पर आस्था का महापर्व चल रहा है. माघ मेले का आगाज हो चुका है और 15 फरवरी तक चलने वाले इस धार्मिक उत्सव में शामिल होने के लिए देश भर से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है. भारी भीड़ के चलते अगर आपको प्रयागराज के लिए ट्रेन का कंफर्म टिकट नहीं मिल पाया है या फ्लाइट की सीटें फुल हो गई हैं, तो आपको अपनी यात्रा टालने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. आप कुछ स्मार्ट तरीके अपनाकर बेहद आराम से संगम नगरी पहुंच सकते हैं, क्योंकि सड़क मार्ग से प्रयागराज की कनेक्टिविटी पहले के मुकाबले काफी बेहतर हो चुकी है.
सड़क मार्ग बनेगा आपका सहारा
अगर आपको ट्रेन या फ्लाइट में जगह नहीं मिली है, तो बस और अपनी निजी गाड़ी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं. दिल्ली, लखनऊ, कानपुर और वाराणसी जैसे बड़े शहरों से आप सीधे सड़क मार्ग के जरिए प्रयागराज पहुंच सकते हैं. इसके लिए यमुना एक्सप्रेसवे (NH-19) और NH-2 जैसे मुख्य रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो आपके सफर को काफी सुगम और तेज बनाते हैं.
इस रूट पर सरकारी बसों के साथ-साथ कई प्राइवेट बसें भी चलती हैं, जिन्हें आप अपनी सुविधा अनुसार बुक कर सकते हैं. प्रयागराज का सिविल लाइंस बस स्टैंड एक मुख्य केंद्र है, जहां से कई राज्यों के लिए बसें लगातार उपलब्ध रहती हैं. यदि आप परिवार के साथ जा रहे हैं, तो अपनी गाड़ी से सफर करना काफी सस्ता और सुविधाजनक रहता है, बस आपको मेला क्षेत्र में ट्रैफिक और पार्किंग का थोड़ा पहले से ध्यान रखना होगा.
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वाराणसी और लखनऊ के रास्ते आसान होगी राह
हवाई मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी एक बहुत ही कारगर रास्ता मौजूद है. अक्सर प्रयागराज के बमरौली एयरपोर्ट के लिए सीधी फ्लाइट्स महंगी या फुल हो जाती हैं, ऐसे में आप वाराणसी या लखनऊ एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट ले सकते हैं. इन दोनों बड़े शहरों के लिए फ्लाइट्स की संख्या ज्यादा होती है और किराया भी अक्सर कम रहता है. वहां उतरने के बाद आप आसानी से टैक्सी या बस ले सकते हैं. वाराणसी से प्रयागराज की दूरी लगभग 150 किलोमीटर और लखनऊ से करीब 200 किलोमीटर है, जिसे आप 3 से 4 घंटे में सड़क मार्ग से आसानी से तय कर सकते हैं.
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सुखद यात्रा के लिए कुछ जरूरी सावधानियां
माघ मेले के दौरान अपने अनुभव को यादगार बनाने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है. कोशिश करें कि आप सुबह तड़के ही मेला क्षेत्र पहुंच जाएं ताकि लंबी कतारों से बच सकें. मेले के पास बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक रहती है, इसलिए स्थानीय स्तर पर आवाजाही के लिए ई-रिक्शा, ऑटो या पैदल चलना ही सबसे बेहतर विकल्प है. ध्यान देने की बत यह है कि जनवरी और फरवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है, इसलिए अपने साथ पर्याप्त गर्म कपड़े, पीने का पानी और कुछ हल्के स्नैक्स जरूर रखें ताकि संगम तट पर आपको किसी भी तरह की असुविधा न हो.