जब भी कम बजट में विदेश घूमने की बात आती है, तो सबसे पहले नेपाल का ही नाम दिमाग में आता है. पड़ोस में है, रास्ता आसान है, जेब पर भारी नहीं पड़ता और सबसे बड़ी राहत की बात ये कि नेपाल जाने के लिए वीजा का कोई झंझट नहीं है. लेकिन अक्सर लोग नेपाल को सिर्फ काठमांडू या पोखरा तक ही सीमित समझ लेते हैं.
जबकि सच यह है कि नेपाल के असली खजाने उन रास्तों पर छिपे हैं, जहां अभी सैलानियों की भीड़ नहीं पहुंची है. अगर आप 2026 में शांति और सुकून वाली ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो नेपाल की ये अनछुई जगहें आपका दिल जीत लेंगी.
कुदरत का असली खजाना
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अब घूमने के नाम पर सिर्फ फोटो नहीं, बल्कि सुकून ढूंढ रहे हैं. ऐसी जगहें, जहां मोबाइल का नेटवर्क कम हो लेकिन दिमाग को आराम मिल जाए. नेपाल की लांगटांग घाटी, मुस्तांग और रारा झील इसी सोच के साथ घूमने वालों के लिए परफेक्ट हैं, क्योंकि यहां अब तक वैसी भारी भीड़ नहीं पहुंची है जैसी नैनीताल या मनाली में दिखती है. इन इलाकों में पहुंचते ही माहौल बदल जाता है. सुबह ट्रैफिक या हॉर्न की आवाज नहीं, बल्कि पहाड़ों से आती ठंडी हवा और परिंदों की चहचहाहट सुनाई देती है. गांवों का सादा जीवन, शांत रास्ते और खुले आसमान के नीचे चलती जिंदगी यह अहसास कराती है कि असली सुकून बड़ी सुविधाओं में नहीं, बल्कि प्रकृति के करीब रहने में है.
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अगर आप भीड़-भाड़ वाले टूरिस्ट स्पॉट्स से ऊब चुके हैं, तो 2026 में मुस्तांग और रारा जैसी जगहों का रुख करना समझदारी होगी. इस वक्त यहां इको-फ्रेंडली टूरिज्म पर जोर दिया जा रहा है, जिससे सुविधाएं भी मिलती हैं और कुदरत के साथ छेड़छाड़ भी नहीं होती. यहां आकर सच में ऐसा लगता है जैसे वक्त थोड़ी देर के लिए थम गया हो.
छुपी जगहें, लेकिन सफर अब झंझट वाला नहीं
भले ही ये जगहें थोड़ी दूर और छिपी हुई लगती हों, लेकिन अब यहां पहुंचना पहले जैसा मुश्किल नहीं रहा. एडवेंचर के शौकीन लोग ट्रेकिंग करते हुए इन वादियों का लुत्फ ले सकते हैं, जो कि एक लाइफ-टाइम एक्सपीरियंस होता है. वहीं, जो लोग आराम से पहुंचना चाहते हैं, उनके लिए अब छोटी लोकल फ्लाइट्स की सुविधा भी काफी बेहतर हो गई है. यानी कम खर्चे और बिना किसी कागजी कार्रवाई (वीजा) के आप एक इंटरनेशनल लेवल का अनुभव ले सकते हैं.
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नेपाल की आध्यात्मिक पहचान
नेपाल सिर्फ ट्रैकिंग और पहाड़ों का देश नहीं है, बल्कि यह रूह को सुकून देने वाला आध्यात्मिक केंद्र भी है. काठमांडू की घाटी में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर और स्वयंभूनाथ स्तूप (मंकी टेंपल) की ऊर्जा ही कुछ ऐसी है कि वहां पहुंचकर मन अपने आप शांत हो जाता है. वहीं दूसरी ओर, भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी आज भी दुनिया भर के शांति चाहने वालों के लिए एक पवित्र तीर्थ है. 2026 में आप इन प्राचीन मंदिरों और स्तूपों की शांति को करीब से महसूस कर सकते हैं और अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी को एक ठहराव दे सकते हैं.
कुल मिलाकर कहें तो, अगर आप महंगे हवाई टिकटों और वीजा की टेंशन से बचकर एक ऐसी जगह जाना चाहते हैं जो आपको भीतर तक खुश कर दे, तो नेपाल के ये अनछुए कोने आपका इंतजार कर रहे हैं.