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'Border 2' का 'पाकिस्तान' है भारत का यह शहर! जानें कहां-कहां हुई फिल्म की शूटिंग

फिल्म 'बॉर्डर 2' रिलीज होते ही दर्शकों में देशभक्ति का जबरदस्त जोश भर रही है. फिल्म में दिखने वाली पाकिस्तान की सरहद, बंकर और युद्ध के खतरनाक दृश्य असल में भारत की धरती पर ही रचे गए हैं. इस फिल्म की शूटिंग देश की कई ऐसी लोकेशन्स पर हुई है जिन्हें देखकर आप दंग रह जाएंगे.

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देहरादून के मालदेवता में बनाया गया पाकिस्तान का विशाल सेट (Photo: Screengrab)
देहरादून के मालदेवता में बनाया गया पाकिस्तान का विशाल सेट (Photo: Screengrab)

सनी देओल के जबरदस्त एक्शन और देशभक्ति के जुनून से सजी फिल्म 'बॉर्डर 2' 23 जनवरी को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. साल 1997 में आई क्लासिक फिल्म 'बॉर्डर' की विरासत को आगे बढ़ाते हुए इस सीक्वल ने आते ही दर्शकों के दिलों की धड़कनें तेज कर दी हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म के वो हैरान कर देने वाले युद्ध के सीन, जिन्हें देखकर हर कोई दांतों तले उंगली दबा लेगा, वे असल में कहां फिल्माए गए हैं? सच तो यह है कि पर्दे पर जिसे आप पाकिस्तान की खतरनाक सीमा और कटीले तार समझ रहे हैं, वह हकीकत में भारत के ही कुछ बेहद खूबसूरत लेकिन दुर्गम इलाकों का हिस्सा है. दरअसल, फिल्म में सरहद का वो असली एहसास पैदा करने के लिए शूटिंग के दौरान भारत के ही कई शहरों को 'मिनी बॉर्डर' में तब्दील कर दिया गया था. तो चलिए जानते हैं, आखिर किन लोकेशन्स पर शूट हुई है आपकी पसंदीदा फिल्म बॉर्डर 2.

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देहरादून बना मिनी बॉर्डर

फिल्म को पर्दे पर जीवंत बनाने के लिए मेकर्स ने उत्तराखंड के देहरादून को अपना मुख्य बेस बनाया. यहां के संतला देवी और मालदेवता क्षेत्र स्थित हल्दूवाला इलाके में बाकायदा एक विशाल सेट तैयार किया गया था, जिसमें एक तरफ भारत और दूसरी तरफ पाकिस्तान की सरहद दिखाई गई. शूटिंग के दौरान यहां का नजारा किसी असली 'फॉरवर्ड बॉर्डर पोस्ट' जैसा लग रहा था, जहां चारों तरफ बंकर, सैन्य वाहन, टैंक और जवानों के टेंट तैनात थे. खुद सनी देओल ने तीन अलग-अलग मौकों पर यहां पहुंचकर अपने हिस्से के महत्वपूर्ण दृश्यों की शूटिंग पूरी की.

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देश के दुर्गम इलाकों में हुई बॉर्डर 2 की शूटिंग

युद्ध के आक्रामक दृश्यों के अलावा फिल्म में ऋषिकेश और राजाजी टाइगर रिजर्व की प्राकृतिक सुंदरता को भी पिरोया गया है, जो दर्शकों को युद्ध के तनाव के बीच एक सुकून भरा अनुभव देती है. वहीं, टैंकों की गड़गड़ाहट और भारी गोलाबारी के दृश्यों को प्रामाणिक बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बबीना छावनी के सैन्य क्षेत्रों का उपयोग किया गया. इसके अलावा, फिल्म की कहानी हमें पुणे के NDA की ट्रेनिंग से लेकर अमृतसर की सरहद और राजस्थान व जम्मू-कश्मीर की धूल भरी चौकियों तक ले जाती है. इन असली लोकेशन्स को चुनने का मकसद सिर्फ दिखावटी खूबसूरती नहीं, बल्कि यह दिखाना था कि हमारे जवान देश के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में किस तरह अपना जीवन बिताते हैं.
 

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