
Varanasi travel guide: शिव की नगरी बनारस जिसे काशी और वाराणसी कहकर भी पुकारा जाता है, एक धार्मिक नगरी है और यहां हर साल न जाने कितने लोग बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन करने आते हैं. बनारस सिर्फ घूमने की जगह नहीं है क्योंकि लोग वहां अपनी सारी उलझने से दूर सुकून की तलाश में भी आते हैं. काशी,बनारस और वाराणसी तीन नामों वाले इस शहर में देखने और घूमने के लिए बहुत सारी जगहें मौजूद हैं और यहां का खाना भी लोगों को दिल जीत लेता है.
पहली बार बनारस जाने की एक्साइटमेंट ही अलह होती है, क्योंकि मन में बाबा के दर्शन की इच्छा, घाटों की सुकून और गंगा आरती देखने में जो मजा है, उसके लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. सोशल मीडिया पर आपने काफी सारी रील्स तो देखी ही होंगी, लेकिन बनारस पहली बार जाने वाले अक्सर ही एक गलती आमतौर पर ही कर देते हैं जिसकी वजह से उनकी पूरी ट्रिप ही खराब हो जाती है.
बनारस की गलियो के किस्से तो आपने काफी सुने होंगे, लेकिन इन गलियों में रिक्शा और गाड़ियों के जाने की जगह नहीं होती है, क्योंकि वहां इस कदर भीड़ होती है. पैदल ही आपको लंबा सफर तय करना पड़ता है इसलिए ऐसे में आपके लिए यह जानना जरूरी है कि बनारस में कौन-से इलाके में रूकना आपके लिए फायदेमंद है, क्योंकि अगर आप मंदिर वाले इलाके से बहुत दूर होटल रूम बुक कर लेते हैं तो आप काफी ज्यादा थक सकते हैं. इसलिए आज हम आपको उन इलाकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपकी बनारस ट्रिप को मजेदार और आरामदायक बना देंगी, इन जगहों पर रूकने से आप बिना ऑटो-रिक्शा के आराम से ही सभी जगह अच्छे से एक्सप्लोर कर पाएंगे.
अगर आप चाहते हैं कि आपकी यात्रा सुकूनभरी हो, आप पैदल ही काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंच जाएं और जब मन करे गंगा नदी के घाटों पर समय बिता सकें तो होटल के लिए सही जगह चुनना बहुत जरूरी है.
गोदौलिया और दशाश्वमेध घाट: सबसे स्मार्ट लोकेशन
अगर आप पहली बार बनारस जा रहे हैं, तो बनारस का मशहूर गोदौलिया चौक इलाका आपके लिए सबसे बेस्ट होने वला है. दशाश्वमेध घाट के आसपास ठहरना मतलब शहर के बिल्कुल दिल में रहना है, यहां से बाबा के मंदिर के गेट नंबर 1 और 4 पैदल दूरी पर हैं. यानी आपको ऑटो लेने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. सुबह उठते ही घाट पहुंच सकते हैं और शाम को बिना किसी भागदौड़ के आपको बिल्कुल आगे से खूबसूरत गंगा आरती देखने को मिल जाएगी.
यहां बजट गेस्ट हाउस से लेकर अच्छे होटल तक हर ऑप्शन मौजूद है. हालांकि, इस इलाके में अधिक भीड़ होती है, लेकिन यही असली बनारसी अनुभव भी देता है. नुक्कड़ पर चाय की दुकानों की खुशबू, घंटियों की आवाज और गंगा किनारे की रौनक सब कुछ गोदौलिया चौक पर मिलती है. गोदौलिया का पान के साथ-साथ यहां भांग वाली लस्सी भी पर्यटकों का ध्यान अपनी तरफ खींचती है.

अस्सी घाट: शांति और संस्कृति का संगम
बनारस का अस्सी घाट काफी फेसम हैं और रील्स में भी अक्सर लोग वहां के बारे में बताते नजर आते हैं. हालांकि घाट मंदिर से थोड़ा दूर है लेकिन अगर आप भीड़ से थोड़ा दूर रहकर बनारस का असली सांस्कृतिक रंग देखना चाहते हैं, तो अस्सी घाट आपके लिए परफेक्ट है. यहां सुबह 'सुबह-ए-बनारस' का अनुभव बेहद खास होता है. योग, संगीत और मंत्रों के बीच गंगा किनारे दिन की शुरुआत करना एक अलग ही एहसास देता है.
अस्सी घाट से आप घाटों के किनारे-किनारे पैदल चलते हुए करीब 20 से 25 मिनट में मंदिर पहुंच सकते हैं. यह रास्ता इतना खूबसूरत होता है कि आपको दूरी का अहसास भी नहीं होगा. यहां कई खूबसूरत हेरिटेज होटल और गेस्ट हाउस हैं, जहां ठहरकर आप शांति और आराम का अनुभव कर सकते हैं.

ललिता और मणिकर्णिका घाट: आध्यात्मिकता के सबसे करीब
अगर आप बनारस की गलियों का असली रोमांच महसूस करना चाहते हैं और मंदिर के बिल्कुल नजदीक रहना चाहते हैं, तो ललिता घाट और मणिकर्णिका घाट के आसपास ठहरना बेहतरीन ऑप्शन है. कॉरिडोर बनने के बाद ललिता घाट सीधे मंदिर परिसर से जुड़ गया है. यानी आप अपने होटल से निकलकर कुछ ही मिनटों में बाबा के दरबार में पहुंच सकते हैं.
यह इलाका थोड़ा भीड़भाड़ वाला और संकरी गलियों से भरा होता है, लेकिन यहीं बनारस की आत्मा बसती है...हर मोड़ पर मंदिर, हर गली में इतिहास. इसके साथ ही मणिकर्णिका घाट पर आपको एक अलग ही दुनिया देखने को मिलेगी, जहां हर समय चिताएं जलती रहती हैं और जीवन का एक नया अध्याय आपको समझ आता है. यहां से आपको सुबह और शाम की आरती भी आराम से देखने को मिलेगी.

बनारस एक ऐसा शहर है जिसे गाड़ियों से नहीं, बल्कि पैदल चलकर समझा जा सकता है. घाटों के किनारे चलते हुए, गलियों में खोते हुए और अचानक किसी मंदिर या चाय की दुकान पर रुकते हुए ही इस शहर की असली खूबसूरती सामने आती है.