शौर्य चक्र (Shaurya Chakra) भारत का एक प्रमुख वीरता सम्मान है, जो शत्रु के सामने असाधारण साहस, बहादुरी और आत्मबलिदान का परिचय देने वाले सैनिकों और नागरिकों को प्रदान किया जाता है. यह पुरस्कार युद्धकाल के अलावा शांति काल में भी दिया जा सकता है, जब कोई व्यक्ति अपने प्राणों की परवाह किए बिना राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए अद्वितीय वीरता दिखाता है.
शौर्य चक्र की स्थापना 4 जनवरी 1952 को की गई थी. यह भारत के तीसरे सर्वोच्च शांति कालीन वीरता पुरस्कारों में से एक है, जो अशोक चक्र और कीर्ति चक्र के बाद आता है. यह सम्मान सेना, नौसेना, वायुसेना, अर्धसैनिक बलों तथा कभी-कभी नागरिकों को भी दिया जाता है, जिन्होंने आतंकवाद, उग्रवाद, या किसी गंभीर खतरे के समय अदम्य साहस का परिचय दिया हो.
यह पदक गोलाकार होता है, जिसके एक ओर अशोक चक्र की आकृति और दूसरी ओर देवनागरी में “शौर्य चक्र” लिखा होता है. इसका उद्देश्य देशवासियों को यह संदेश देना है कि मातृभूमि की रक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए सर्वोच्च साहस का प्रदर्शन करने वालों को राष्ट्र सदैव सम्मानित करता है.
शौर्य चक्र उन वीरों को दिया जाता है जिन्होंने दुश्मन से मुकाबला करते हुए अपने कर्तव्य का पालन निस्वार्थ भाव से किया हो, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों. यह सम्मान केवल एक पदक नहीं, बल्कि बलिदान, कर्तव्यनिष्ठा और देशप्रेम की भावना का प्रतीक है.
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