पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi) को पवित्रोपना एकादशी और पवित्रा एकादशी भी कहा जाता है. यह हिंदुओं का एक पवित्र दिन है. पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. इस दिन संतान प्राप्ति के लिए पूजा की जाती है. मान्यताओं के अनुसार, एकादशी का व्रत करने वाले जातकों को जीवन भर सुख की प्राप्ति होती है और जीवन उपरांत मोक्ष मिलता है. पुत्रदा एकादशी साल में दो बार किया जाता है. एक सावन में होने वाला श्रावण पुत्रदा एकादशी (Shravana Putrada Ekadashi), जो जुलाई-अगस्त में पड़ता है और पौष पुत्रदा एकादशी (Paush Putrada Ekadashi), जो दिसंबर-जनवरी में पड़ता है
व्रतों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्रत एकादशी का माना जाता है. एकादशी का नियमित व्रत रखने से मन की चंचलता खत्म होती है, धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है. मनोरोग जैसी समस्याएं भी इससे दूर होती हैं. इस उपवास को रखने से संतान संबंधी हर चिंता और समस्या का निवारण हो जाता है (Putrada Ekadashi rituals).
इस दिन, 24 घंटे का उपवास रखा जाता है और विशेष जिस दंपति के संतान नहीं होता, वह पति और पत्नी, पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. यह दिन विशेष रूप से विष्णु के अनुयायी वैष्णवों द्वारा मनाया जाता है (Putrada Ekadashi worship).
Putrada Ekadashi 2026: सावन पुत्रदा एकादशी के व्रत का पारण 24 अगस्त को किया जाएगा. इस दिन सावन का आखिरी सोमवार भी है. हिंदू पंचांग के अनुसार, व्रत पारण के लिए सुबह 5 बजकर 58 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 39 मिनट तक का समय सबसे शुभ रहने वाला है.
putrada ekadashi 2026: पुत्रदा एकादशी पर इन 4 जगहों पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है. जानें दीपदान का सही समय, विधि और भगवान विष्णु की पूजा का महत्व.
Sawan Putrada Ekadashi 2026: आज 23 अगस्त 2026 को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, पारण समय, पूजा विधि, मंत्र, व्रत कथा और भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के उपाय.
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल एकादशी तिथि की शुरुआत 23 अगस्त की रात करीब 2 बजे होगी और इसका समापन 24 अगस्त की सुबह 4 बजकर 18 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर व्रत 23 अगस्त को रखा जाएगा. वहीं व्रत का पारण 24 अगस्त को किया जाएगा.
Putrda Ekadashi 2026: पुत्रदा एकादशी पर इस बार त्रिवेणी योग बन रहा है. 24 से 28 अगस्त तक झूलनोत्सव और 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी मनाई जाएगी. जानें किन 5 राशियों को लाभ मिल सकता है.
Putrada Ekadashi 2026: श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी 2026 में 23 अगस्त, रविवार को मनाई जाएगी. भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी को धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व दिया गया है.
Putrada Ekadashi 2026: व्रतों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्रत एकादशी का होता है. एकादशी का नियमित व्रत रखने से मन कि चंचलता समाप्त होती है. धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है, हारमोन की समस्या भी ठीक होती है तथा मनोरोग दूर होते हैं. पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति तथा संतान की समस्याओं के निवारण के लिए किया जाने वाला व्रत है. सावन की पुत्रदा एकादशी विशेष फलदायी मानी जाती है.
पद्मिनी एकादशी 2026 इस बार 27 मई को मनाई जाएगी. जानें एकादशी तिथि, व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पारण समय और इस व्रत का धार्मिक महत्व. धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, रानी पद्मिनी ने इस व्रत के प्रभाव से पुत्र प्राप्ति का वरदान पाया था. तभी से इस एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है.
Putrada Ekadashi 2025: पौष पुत्रदा एकादशी तिथि 30 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 50 मिनट से लेकर 31 दिसंबर को सुबह 5 बजे तक रहने वाली है. ऐसे में कुछ लोग 30 दिसंबर को यानी आज यह व्रत कर रह हैं तो कुछ 31 दिसंबर यानी कल भी इस व्रत को करने वाले हैं.
Putrada Ekadashi 2025 की तिथि को लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है. जानें 30 या 31 दिसंबर को व्रत कब रखें, पारण का सही समय, शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व.
Putrada Ekadashi:साल 2025 के अंतिम दिनों में पौष पुत्रदा एकादशी का पावन संयोग बन रहा है. यह व्रत 30 दिसंबर की सुबह से प्रारंभ होकर 31 दिसंबर की सुबह तक रहेगा, जिस कारण इसे वर्ष 2025 की आखिरी एकादशी माना जा रहा है.
Putrada Ekadashi 2025 Kab Hai: पौष पुत्रदा एकादशी 30 दिसंबर की सुबह 7:50 बजे शुरू होगी और 31 दिसंबर को सुबह 5 बजे इसका समापन होगा. ऐसे में कुछ लोग 30 दिसंबर तो कुछ 31 दिसंबर को व्रत रखने वाले हैं.
Putrada Ekadashi 2025: पुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से संतान सुख के लिए किया जाता है. कहा जाता है कि जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं या जिनकी संतान को लेकर परेशानियां हैं, उनके लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी होता है.
Putrada Ekadashi:पुत्रदा एकादशी हिंदू पंचांग में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है. यह एकादशी पौष मास के शुक्ल पक्ष में आती है और भगवान विष्णु को समर्पित होती है. इसे पुत्र सुख और पारिवारिक समृद्धि के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है.
साल 2025 के अंतिम दिन पौष पुत्रदा एकादशी की तिथि है, क्योंकि यह व्रत 30 दिसंबर की सुबह से शुरू होकर 31 दिसंबर की सुबह तक होने वाला है. वहीं वैष्णव संप्रदाय के अनुसार एकादशी तिथि 31 दिसंबर को होगी.
Paush Putrada Ekadashi 2025:पौष पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में एक विशेष और पावन तिथि मानी जाती है. यह एकादशी पौष मास के शुक्ल पक्ष में आती है और भगवान विष्णु को समर्पित होती है.
Vaikuntha Ekadashi 2025: साल 2025 की आखिरी एकादशी यानी वैकुंठ एकादशी आने वाली है. जो भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण पावन तिथि मानी जा रही है. इस एकादशी को लेकर लोग बड़े असमंजस में हैं कि यह कब मनाई जाएगी. तो आइए जानते हैं इसकी सही डेट.
Sawan Putrada Ekadashi 2025: 5 अगस्त 2025 यानी आज पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ सावन की पुत्रदा एकादशी मनाई जा रही है. इस बार रवि योग और गजलक्ष्मी राजयोग का संयोग एकादशी को और भी खास बना रहा है.
पुत्र-पुत्री की सुख-समृद्धि की कामना के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है. और खास उपाय करने से मां लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, पुत्रदा एकादशी साल में दो बार आती है. पहली श्रावण मास में और दूसरी पौष माह में आती है. श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी 5 अगस्त, मंगलवार को मनाई जाएगी.
Sawan Putrada Ekadashi 2025: सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है, जो पवित्रता एकादशी के नाम से भी जानी जाती है. हिंदू मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और विष्णु जी की पूजा करने से नि:संतान जोड़ों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है. इस बार पुत्रदा एकादशी का व्रत 5 अगस्त को रखा जाएगा.