परम वीर चक्र (Param Vir Chakra) भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है, जो युद्ध के मैदान में असाधारण वीरता, साहस और बलिदान के लिए प्रदान किया जाता है. यह सम्मान उन सैनिकों को दिया जाता है जिन्होंने दुश्मन के सामने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी अदम्य साहस का परिचय दिया हो और देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की परवाह किए बिना वीरतापूर्ण कार्य किया हो.
परम वीर चक्र की स्थापना 26 जनवरी 1950 को हुई थी, जब भारत एक गणराज्य बना. यह पदक कांस्य से बना होता है और इसके मध्य में इंद्र का वज्र अंकित रहता है, जो शक्ति, साहस और अजेयता का प्रतीक है. इसके चारों ओर कमल के फूल बने होते हैं, जो शुद्धता और त्याग का संदेश देते हैं. इस सम्मान को गले में बैंगनी रंग के फीते से पहनाया जाता है.
यह सम्मान थल सेना, नौसेना और वायु सेना, तीनों सेनाओं के अधिकारियों और जवानों को दिया जा सकता है. परम वीर चक्र शांति काल में नहीं, बल्कि केवल युद्ध या सशस्त्र संघर्ष के दौरान किए गए असाधारण पराक्रम के लिए प्रदान किया जाता है. कई बार यह सम्मान मरणोपरांत भी दिया जाता है, क्योंकि अनेक वीर सैनिक देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं.
अब तक बहुत ही कम सैनिकों को परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया है, जिससे इसकी गरिमा और भी बढ़ जाती है. प्रत्येक परम वीर चक्र विजेता की कहानी साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति की मिसाल होती है. ये वीर सैनिक आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनते हैं और यह सिखाते हैं कि देश की स्वतंत्रता और सुरक्षा सर्वोपरि है.
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