मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (Muslim Rashtriya Manch) की स्थापना 2002 में की गई थी. यह मंच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा एक सामाजिक संगठन है, जो विशेष रूप से मुस्लिम समाज के बीच संवाद, समरसता और राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करने का कार्य करता है. मंच का मूल उद्देश्य यह है कि भारत के मुसलमान खुद को गर्व से "राष्ट्रवादी" कहें और देश के विकास में भागीदार बनें.
MRM समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रमों, सम्मेलनों और जागरूकता अभियानों का आयोजन करता रहा है जिसमें गौ रक्षा और पशु कल्याण को लेकर मुस्लिम समुदाय में जागरूकता फैलाना, स्वच्छ भारत अभियान, संविधान दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर विशेष आयोजन शामिल है. साथ ही वेद, गीता और कुरान के साझा मूल्यों को उजागर कर समाज में भाईचारे का संदेश देना और मुस्लिम महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार संबंधी कार्यक्रम किए जाते हैं.
MRM का मानना है कि भारत में मुसलमानों की भूमिका सिर्फ एक समुदाय तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें राष्ट्र के जिम्मेदार नागरिक के रूप में आगे आना चाहिए. मंच ने विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों के साथ संवाद कायम कर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूती दी है.
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक मोहम्मद फैज ने मुसलिम समाज पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज मुस्लिम समाज में सुधार की बहुत आवश्यकता है. जब एमबीबीएस डॉक्टर भी बम लेकर फटने लगे तो हिंदू समाज में शंका उत्पन्न होती है कि कहीं ये हमारे समाज में न आ जाए. मुसलमानों ने अभी तक समाज सुधार नहीं किया है.
2002 का वह दिन था. पश्चिम एशिया के सात देशों के सात राजदूत दिल्ली में संघ के मुख्यालय 'केशव कुंज' में केएस सुदर्शन के साथ वार्त्तालाप करने के लिए उपस्थित थे. सभी राजदूत संघ प्रमुख केएस सुदर्शन की बातें सुनने के लिए दो घंटे तक जमीन पर बैठे रहे. इस चर्चा में के एस सुदर्शन ने भारत की हजारों वर्षों की समावेशी परंपरा से मुस्लिम देशों के राजदूतों को अवगत कराया. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.