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लिट्टी-चोखा

लिट्टी-चोखा

लिट्टी-चोखा

भारतीय व्यंजनों की बात हो और लिट्टी-चोखा (Litti Chokha) का नाम न आए, यह संभव नहीं. बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुकी यह डिश न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि सेहत से भरपूर भी है. यह व्यंजन गांव से लेकर शहरों तक हर किसी की पसंद बन चुका है और आज यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रियता पा रहा है.

लिट्टी-चोखा मूल रूप से बिहार और पूर्वांचल का पारंपरिक व्यंजन है. पहले यह ग्रामीण इलाकों में किसानों का मुख्य भोजन माना जाता था क्योंकि यह पौष्टिक, सस्ता और लंबे समय तक ऊर्जा देने वाला होता है. धीरे-धीरे यह व्यंजन शहरों तक पहुंचा और आज देश-विदेश के रेस्टोरेंट्स में भी इसे परोसा जाने लगा है.

लिट्टी गेहूं के आटे से बनी होती है, जिसके अंदर सत्तू (भुना हुआ चना पाउडर) भरा जाता है. सत्तू में सरसों का तेल, लहसुन, अदरक, हरी मिर्च, प्याज, नींबू का रस और हरा धनिया मिलाकर मसालेदार भरावन तैयार किया जाता है. लिट्टी को पारंपरिक रूप से अंगीठी या गोइठे (उपले) की आग में सेंका जाता है. आजकल इसे तंदूर और ओवन में भी बना लेते हैं. फिर तैयार लिट्टी को पिघले हुए देसी घी में डुबोकर परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है.

लिट्टी का मजा चोखा के बिना अधूरा है. इसको आप तीन अलग-अलग तरह के चोखे के साथ परोस सकते हैं.  

बैंगन का चोखा- भुने हुए बैंगन, सरसों का तेल, प्याज, लहसुन और हरी मिर्च से तैयार किया जाता है.

आलू का चोखा- उबले आलू, प्याज, मिर्च, धनिया और नींबू रस को मिलाकर बनाया जाता है.

टमाटर का चोखा- अंगीठी पर भुने टमाटर में मसाले मिलाकर बनाया जाता है. 

सत्तू में प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स की भरपूर मात्रा होती है. तो वहीं देसी घी पाचन को मजबूत बनाता है और ऊर्जा देता है. चोखा में ताजी सब्जियों के कारण विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मिलते हैं.

आज लिट्टी-चोखा सिर्फ बिहार-झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों और विदेशों के भारतीय रेस्टोरेंट्स में भी उपलब्ध है. कई जगहों पर इसे नए अंदाज में परोसा जा रहा है- जैसे चीज लिट्टी, पनीर लिट्टी और फ्यूजन चोखा.

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