के आर नारायणन (Kocheril Raman Narayanan) भारतीय राजनीति के उन गिने-चुने नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने न केवल अपने बुद्धिमत्ता और विद्वता से देश को दिशा दी, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के प्रतीक बनकर उभरे. वे भारत के दसवें राष्ट्रपति (1997–2002) थे और पहले दलित राष्ट्रपति भी. उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और सिद्धांतों की मिसाल है.
के आर नारायणन का जन्म 27 अक्टूबर 1920 को केरल के उज़्हावूर गांव में एक निर्धन परिवार में हुआ था. उनके पिता एक आयुर्वेदिक चिकित्सक थे, लेकिन आर्थिक स्थिति बेहद कठिन थी. उन्हें स्कूली शिक्षा के दौरान कई बार दूसरे बच्चों से किताबें मांगकर पढ़ना पड़ता था.
लेकिन कठिनाइयों ने उनके आत्मबल को नहीं तोड़ा. उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज, त्रिवेंद्रम से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातक किया और फिर प्रसिद्ध लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई की, जहां उनके शिक्षक विख्यात अर्थशास्त्री हेरोल्ड लास्की थे. लास्की ने उन्हें "असाधारण छात्र" कहा था.
नारायणन ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की, लेकिन जल्द ही वे भारतीय विदेश सेवा (IFS) में शामिल हो गए. उन्होंने बर्मा, जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भारत के प्रतिनिधि के रूप में काम किया. पंडित नेहरू ने उन्हें "सर्वश्रेष्ठ राजनयिक" कहा था.
1970 के दशक में वे राजनीति में आए और लोकसभा के लिए चुने गए. वे नेहरू मंत्रिमंडल में विदेश राज्य मंत्री रहे. बाद में वे भारत के उपराष्ट्रपति (1992–1997) बने और फिर 1997 में सर्वसम्मति से राष्ट्रपति चुने गए.
8 जून 1951 को के. आर. नारायणन ने बर्मा के यामेथिन में जन्मी टिनटिन से विवाह किया था. भारतीय नागरिकता लेने के बाद उन्होंने नाम बदलकर उषा नारायणन रखा. उनकी दो बेटियां हैं चित्रा नारायणन, जो पूर्व भारतीय विदेश सेवा अधिकारी रहीं. उन्होंने स्वीडन, लातविया, तुर्की, स्विट्ज़रलैंड व लिकटेंस्टीन, और होली सी (Vatican) में भारत की राजदूत के रूप में कार्य किया. दूसरी बेटी चंद्रिका, जो डबलिन में लेखिका एवं आर्ट्स मैनेजर हैं.
के आर नारायणन का निधन 9 नवंबर 2005 को हुआ.