गढ़मुक्तेश्वर (Garhmukteshwar) उत्तर प्रदेश के हापुर जिले के पास स्थित एक छोटा लेकिन ऐतिहासिक शहर और तहसील है. यह शहर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है, इसलिए यहां से दिल्ली तक पहुंचना काफी आसान है. गढ़मुक्तेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग 9 (NH-9) पर बसा हुआ है, जो इसे सीधे दिल्ली से जोड़ता है. यह शहर गंगा नदी से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे इसका धार्मिक महत्व भी काफी बढ़ जाता है.
अगर आंकड़ों की बात करें तो 2011 की जनगणना के अनुसार गढ़मुक्तेश्वर तहसील का कुल क्षेत्रफल लगभग 272 वर्ग किलोमीटर है. इसमें से करीब 237.38 वर्ग किलोमीटर ग्रामीण इलाका है, जबकि 34.13 वर्ग किलोमीटर शहरी क्षेत्र में आता है. इस क्षेत्र की कुल आबादी लगभग 46,077 है. यहां कुल 64,688 घर बताए गए हैं और पूरे ब्लॉक में करीब 137 गांव शामिल हैं. यह एक ऐसा इलाका है जहां शहर और गांव दोनों का संतुलन देखने को मिलता है.
गढ़मुक्तेश्वर का इतिहास बहुत पुराना और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है. इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों जैसे भागवत पुराण और महाभारत में भी मिलता है. कुछ मान्यताओं के अनुसार यह क्षेत्र कभी हस्तीनापुरका हिस्सा था, जो पांडवों की राजधानी हुआ करती थी.
इस शहर में एक प्राचीन किला भी है, जिसे मराठा नेता मीर भवन ने ठीक करवाया था. बाद में अंग्रेजों के समय में इसी किले को तहसील मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया. यहां मुक्तेश्वर महादेव मंदिर स्थित है. यह मंदिर गंगा माता को समर्पित है और यहां चार प्रमुख मंदिरों में उनकी पूजा की जाती है.
इस शहर में करीब 80 ‘सती स्तंभ’ भी मौजूद हैं. ये वे स्थान बताए जाते हैं जहां पुराने समय में हिंदू विधवाओं ने सती प्रथा का पालन किया था. हालांकि इस बारे में पूरी तरह स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन यह इस जगह के ऐतिहासिक और सामाजिक पहलुओं को दर्शाता है.
गढ़मुक्तेश्वर में एक पुरानी मस्जिद भी है, जिसे गियासुद्दीन बलबन ने बनवाया था. इस मस्जिद में अरबी भाषा में एक शिलालेख भी है, जो 1283 ईस्वी (682 हिजरी) का बताया जाता है. यह इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता और इतिहास को दिखाता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई में गंगा एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया, जो मेरठ से प्रयागराज तक लगभग 594 किलोमीटर लंबा है और यात्रा समय को 6 घंटे तक कम करेगा. यह एक्सप्रेस वे पूर्व और पश्चिम यूपी को जोड़ते हुए धार्मिक स्थलों जैसे गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेल्हा देवी धाम, चंद्रिका देवी शक्ति पीठ और त्रिवेणी संगम तक पहुंच को आसान बनाएगा.