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अशोक चक्र

अशोक चक्र

अशोक चक्र

अशोक चक्र (Ashok Chakra) भारत के राष्ट्रीय ध्वज का एक महत्वपूर्ण और गौरवशाली प्रतीक है. यह चक्र नीले रंग का होता है और तिरंगे के मध्य श्वेत पट्टी पर स्थित है. अशोक चक्र का इतिहास मौर्य सम्राट अशोक से जुड़ा है, जिन्होंने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में भारत पर शासन किया था. यह चक्र सारनाथ में स्थित अशोक स्तंभ के सिंह स्तंभ के शीर्ष पर बने धर्मचक्र से प्रेरित है.

अशोक चक्र में कुल 24 तीलियां (spokes) होती हैं, जो जीवन के विभिन्न मूल्यों और सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करती हैं. ये तीलियां निरंतर गति, प्रगति और समय के चक्र को दर्शाती हैं. इसका मुख्य संदेश यह है कि जीवन में स्थिरता नहीं, बल्कि निरंतर आगे बढ़ते रहना ही विकास का मार्ग है. यह चक्र धर्म, न्याय, सत्य और कर्तव्य का भी प्रतीक माना जाता है.

बहादुरी का असीम स्तर दिखाने वाले योद्धा को अशोक चक्र सम्मान दिया जाता है. यह सम्मान थल, वायु या नौसेना के किसी भी पुरुष या महिला को, या फिर किसी रिजर्व बल, टेरिटोरियल आर्मी के जवान को उसकी बहादुरी के लिए मिल सकता है. इसके अलावा आर्म्ड फोर्सेस की नर्सिंग सर्विस, अस्पताल के स्टाफ्स या फिर इन सेनाओं के साथ काम करने वाले सिवलियंस को भी दिया जाता है. मेडल गोल होता है. गोल्ड-गिल्ट से बनाया जाता है. अशोक चक्र बीच में होता है. उसके चारों तरफ कमल के फूल का हार बना होता है. अशोक चक्र हिंदी और अंग्रेजी में लगा रहता है. इसका रिबन हरे और नारंगी रंग के दो बराबर हिस्सों में बंटा होता है. 

भारत के राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र का स्थान इस बात का प्रतीक है कि हमारा देश सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है. यह हर भारतीय को अपने कर्तव्यों का पालन करने, देश की एकता और अखंडता बनाए रखने तथा निरंतर प्रगति की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है. इस प्रकार, अशोक चक्र न केवल एक ऐतिहासिक चिन्ह है, बल्कि यह हमारे राष्ट्रीय चरित्र और मूल्यों का जीवंत प्रतीक भी है.

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