रिश्तों के वृक्ष पर तब तक फल नहीं लगता, जब तक कि उसमें स्नेह की खाद न पड़ी हो. संजय सिन्हा की कहानी में जानें हर इंसान क्यों कहीं न कहीं भागता फिर रहा है और खोज रहा है अपनी जिंदगी.