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क्या Taliban के लिए मानवाधिकार, कायदे, कानून का कोई मतलब नहीं? देखें मुकाबला

क्या Taliban के लिए मानवाधिकार, कायदे, कानून का कोई मतलब नहीं? देखें मुकाबला

तालिबान दम-खम के साथ अफगानिस्तान में जम चुका है. धीरे-धीरे अफनानिस्तान पर तालिबान का रंग चढ़ रहा है. अफगानिस्तान दर्द से तड़प रहा है. बंदूक के दम पर तालिबानी आतंकी आवाम के अधिकारों और सम्मान को रौंद रहे हैं. अमेरिका भी कह चुका है कि अगर तालिबान ने लोगों को उनके हिसाब से आजादी दी तो अमेरिका को तालिबान से कोई एतराज नहीं होगा. फिलहाल तालिबान के हाथों में अमेरिकी हथियार नजर आ रहे हैं और करीब-करीब साफ हो चुका है कि तालिबान नाम की दिक्कत अब इस पूरे इलाके में बरसों तक रहने वाली है. क्या तालिबान के लिए मानवाधिकार, कायदे, कानून का कोई मतलब नहीं? ऐसे में सवाल है कि भारत तालिबान के नाम की चुनौती से कैसे निपटेगा. देखें मुकाबला का ये एपिसोड.

The Taliban is firmly established in Afghanistan after its seizure of the country. Taliban terrorists are trampling on the rights and dignity of the people on the basis of terror and vandalism. America has also said that if the Taliban gives freedom to the people according to them, then America will have no objection to the Taliban. At present, American weapons are being used by the Taliban and it is almost clear that the problem named Taliban is going to remain in this entire area for years. Do Human Rights, Laws mean nothing to the Taliban? In such a situation, the question is how India will deal with the challenge named Taliban. Watch this episode.

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