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WhatsApp और Messenger में भी यूज किया गया है Signal प्रोटोकॉल

Signal मैसेंजर इन दिनों काफी चर्चा में है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि Signal प्रोटोकॉल को WhatsApp में भी यूज किया गया था? Signal कैसे बना और इसके पीछे WhatsApp के को-फाउंडर का कितना योगदान है, जानें सबकुछ.

Signal Signal
स्टोरी हाइलाइट्स
  • Signal ने WhatsApp को भी दी है सिक्योरिटी, 2016 में हुआ था करार
  • Signal Messenger के सीईओ Moxie हैं, जबकि Signal Foundation के चेयरमैन ब्रायन ऐक्टन हैं.
  • Signal प्रोटोकॉल क्या है जिसे WhatsApp के लिए भी यूज किया गया?

इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp को को दो लोगों ने मिल कर बनाया था और बाद में फेसबुक ने WhatsApp को खरीद लिया. WhatsApp के एक फाउंडर ने कुछ समय के बाद पैसे लेकर WhatsApp का दामन छोड़ दिया और उन्होंने एक शख्स के साथ मिल कर Signal मैसेंजर तैयार कर लिया. हालांकि Signal का वजूद पहले से था, लेकिन तब ये किसी और नाम से था. 

गौरतलब है कि WhatsApp को ब्रायन ऐक्टन और जेन कुम ने मिल कर तैयार किया था. 2014 में फेसबुक ने WhatsApp खरीदा और 2017 में WhatsApp के को-फाउंडर ब्रायन ऐक्टन ने कंपनी छोड़ दी. कंपनी छोड़ने की वजह मार्क जकरबर्ग के साथ WhatsApp की पॉलिसी को लेकर तकरार बताई जाती है. aajtak.in से बातचीत में ब्रायन ऐक्टन ने तब बताया था कि WhatsApp अपनी पहचान खो चुका है. 

मार्क जकरबर्ग WhatsApp से पैसा कमाना चाहते थे, लेकिन WhatsApp के क्रिएटर इसके खिलाफ थे.. 

फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग चाहते थे कि WhatsApp से पैसे कमाए जाएं, लेकिन इसके फाउंडर इसके अगेंस्ट में थे. मार्क जकरबर्ग नहीं माने और ब्रायन ने कंपनी छोड़ दी. हालाकि इसके लिए उन्होंने काफी पैसे लिए और अरबति बन गए. 

फेसबुक से निकलने के बाद 2018 में उन्होंने लोगों से फेसबुक डिलीट करने को कहा. क्योंकि तब कैंब्रिज अनालाटिका का मामला आया था जहां फेसबुक पर यूजर्स का डेटा चोरी करने का आरोप लगा. इसी साल यानी 2018 में ब्रायन ऐक्टन एक मश्हूल कंप्यूटर साइंटिस्ट और कोडर Moxie Marlinspike के साथ मिल कर Signal Messenger LLC की शुरुआत कर दी. 

कौन हैं Moxie Marlinspike?

हालांकि Moxie Marlinspike को Signal के फाउंडर के तौर पर जाना जाता है, क्योंकि इस ऐप में उनका ही दिमाग लगा है. Moxie Marlinspike ने 2013 में ही Open Whisper Systems की शुरुआती की थी और इसी के तहत बाद Signal प्रोटोकॉल और Signal मैसेंजर की शुरुआत की गई. 

Moxie Marlnspike एक सिक्योरिटी रिसर्चर भी हैं और उन्होंने 2010 में Whisper System की शुरुआत की. इसके एक एन्क्रिप्टेड टेक्सटिंग प्रोग्राम TextSecure लॉन्च किया गया. इसी दौरान एन्क्रिप्टेड वॉयस कॉलिंग के लिए RedPhone भी पेश कर दिया गया. कुल मिला कर यही वो समय था जब Signal मैसेंजर की नींव रखी गई या कॉन्सेप्ट शुरू किया गया. 

अपनी पहचान खो चुका है WhatsApp: को-फाउंडर, ब्रायन ऐक्टन


WhatsApp और Facebook मैसेंजर में भी दिया गया Signal Protocol

दिलचस्प ये है कि 2014 के आखिर में Moxie Marlnspike की कंपनी Open Whisper System ने WhatsApp को सिग्नल प्रोटोकॉल के तहत एंड टु एंड एन्क्रिप्शन देने के लिए पार्टनर्शिप किया. इसके बाद Open Whisper System का Signal प्रोटोकोल गूगल के मैसेंजिंग ऐप Allo में भी दिया गया. 

एक और दिलचस्प बात ये है कि 2016 में फेसबुक मैसेंजर में सिक्रेट चैट शुरू किया गया और तब भी इसके लिए Open Whisper System का Signal प्रोटोकॉल यूज किया गया जो WhatsApp में यूज किया गया था. 

क्या है सिग्नल प्रोटोकॉल? 


ये एक क्रिप्टोग्राफिक प्रोटोकॉल है जिसे वॉयस और वीडियो कॉल्स में एंड टु एंड एन्क्रिप्शन देने के लिए किया जाता है. एंड टु एंड एन्क्रिप्शन यानी सेंडर और रीसिवर के अलावा कॉल्स या चैट्स कोई भी तीसरा नही पढ़ सकता है और न ही सर्वर में इसका ट्रेस रहता है. 

Moxie Marlnspike की कंपनी Open Whisper System ने 2013 में ये प्रोटोकॉल तैयार किया. इसी प्रोटोकॉल को एंड टु एंड एन्क्रिप्शन के लिए वॉट्सऐप और फेसबुक मैसेंजर में यूज किया गया.


2018 में WhatsApp को फाउंडर ब्रायन ऐक्टन Moxie Marlnspike के साथ जुड़ गए और मिल कर Signal Foundation तैयार कर दिया जो एक नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन है. शुरुआत में ब्रायन ने इस फाउंडेशन में अपनी तरफ से 50 मिलियन डॉलर का निवेश किया. 

इसके बाद से अब तक Signal Foundation के चेयरमैन ब्रायन ऐक्टन हैं और Signal Messegner के सीईओ Moxie Marlnspike हैं. एक बात और, Moxie Marnlspike का असली नाम  Matthew Rosenfeld है.
 

 

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