साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है, जिसमें विक्टिम को बड़ी ही चालाकी से शिकार बनाया और उनके बैंक खाते से टोटल 22 करोड़ रुपये उड़ा लिए गए हैं. विक्टिम 85 साल के बुजुर्ग हैं और उनके साथ करीब 3 महीने तक साइबर ठगी का ये खेल चल रहा था.
पुणे पुलिस ने मामले को दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. यह पुणे शहर में होने वाला एक बड़ा साइबर फ्रॉड है. साइबर ठगी का ये केस अक्टूबर 2025 से 12 जनवरी 2026 तक चला.
अलग-अलग 150 बैंक अकाउंट में रकम ट्रांसफर की है
इकॉनोमिक्स ऑफेंस विंग के अधिकारियों ने बताया है कि विक्टिम ने करीब अलग-अलग 150 बैंक अकाउंट में रकम ट्रांसफर की है. यह बैंक अकाउंट सात बैंक में मौजूद हैं, जो नोएडा, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे शहरों में मौजूद हैं. जांच एजेंसी का मानना है कि साइबर ठगी के लिए ज्यादातर म्यूल अकाउंट का यूज किया गया है.
WhatsApp Group में किया शामिल
विक्टिम बुजुर्ग ने साइबर ठगी के इस केस में अपनी पूरी जिंदगी की कमाई गंवा दी है. उन्होंने बताया है कि एक दिन उनको एक लिंक के जरिए WhatsApp Group में शामिल किया गया है. इसके बाद विक्टिम को शेयर मार्केट में रुपये लगाने का सलाह दी और कुछ ही दिनों में रुपये डबल करने का लालच दिया गया है. साइबर ठगों ने विक्टिम का भरोसा जीता और उनको इनवेस्टमेंट करने को कहा.
अलग-अलग बैंक अकाउंट में रुपये ट्रांसफर कर दिए
इसके बाद विक्टिम ने अलग-अलग बैंक अकाउंट में रुपये ट्रांसफर कर दिए. फिर विक्टिम ने जब रुपयों को निकालने की कोशिश की तो वह कोशिश फेल हो गई. इसके बाद विक्टिम को समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं.
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साइबर स्कैमर्स का बड़ नेटवर्क और कर रहे 26 मोबाइल यूज
इकॉनोमिक्स ऑफेंस विंग ने बताया है कि स्कैमर्स ने करीब 26 मोबाइल नंबर्स का यूज किया गया है, जिसमें मल्टीपल इंटरनेट बेस्ड नंबर्स और मल्टीपल ट्रेडिंग एप्लीकेशन मौजूद हैं. जनवरी 2023 के बाद का यह अब तक का सबसे बड़ी कीमत वाला साइबर फ्रॉड है.
बैंक लगातार भेजता रहा अलर्ट
विक्टिम को बैंक की तरफ से बड़े और बार-बार के ट्रांजैक्शन को संदिग्ध बताते हुए अलर्ट भी भेजे. विक्टिम बुजुर्ग ने बैंक के अलर्ट को इग्नोर किया और रुपये भेजते रहे. यहां गौर करने वाली बात यह है कि विक्टिम ने इस इनवेस्टमेंट को लेकर अपने रिश्तेदारों को भी जानकारी नहीं दी है. पुणे में आईटी कंपनियों में काम करने वाले उनके बेटे और बहू, दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं.