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फोन आया, बोला NIA से बोल रहे हैं… कुछ घंटों में 78 साल की महिला ने ट्रांसफर कर दिए 38 लाख

NIA के नाम पर एक बड़ी साइबर ठगी सामने आई है. एक महिला के अकाउंट से 38 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए. डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड AI के आने के बाद और भी तेजी से बढ़ रहा है.

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डिजिटल अरेस्ट का नए मामले में हुई बड़ी ठगी
डिजिटल अरेस्ट का नए मामले में हुई बड़ी ठगी

बेंगलुरु में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां 78 साल की एक महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगों ने करीब 38 लाख रुपये ठग लिए.

ठगों ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA का अधिकारी बताया और जांच का डर दिखाकर महिला से पैसे ट्रांसफर करवा लिए. रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना बेंगलुरु के इंदिरानगर इलाके की है.

महिला को 11 मार्च की दोपहर करीब 3 बजे एक फोन कॉल आया. कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अश्लील कंटेंट से जुड़े एक मामले में हुआ है.

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फोन करने वाले ने दावा किया कि उसके नाम से मुंबई में एक बैंक अकाउंट खोला गया है और उस अकाउंट का इस्तेमाल आतंकियों को पैसा भेजने के लिए किया गया है.

जांच अधिकारी बता कर फ्रॉड लोगों को बनाते हैं निशाना

फोन पर बात करने वाले लोगों ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अधिकारी बताया. उन्होंने महिला को कहा कि वह एक गंभीर जांच के दायरे में है और अगर उसने सहयोग नहीं किया तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता है. ठगों ने महिला को डराकर कहा कि उसे जांच पूरी होने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा जा रहा है.

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इसके बाद ठगों ने महिला को कई घंटों तक फोन और WhatsApp वीडियो कॉल पर रखा. उसे कहा गया कि वह किसी से बात न करे और फोन कॉल बंद न करे क्योंकि जांच चल रही है. इसी दौरान ठगों ने महिला को यह विश्वास दिलाया कि उसके बैंक खातों की RBI के जरिए वेरिफिकेशन करनी होगी.

जांच के नाम पर महिला को अपने खाते से पैसे एक दूसरे खाते में ट्रांसफर करने को कहा गया. डर और दबाव में आकर महिला ने RTGS के जरिए करीब 38 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. कुछ समय बाद जब कोई जवाब नहीं मिला तो महिला को शक हुआ कि उसके साथ ठगी हो गई है.

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बाद में इस मामले की शिकायत ईस्ट डिविजन साइबर क्राइम पुलिस में दर्ज कराई गई. पुलिस अब कॉल करने वाले ठगों की पहचान करने और पैसे के ट्रेल को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है.

बढ़ रहा है डिजिटल अरेस्ट का फ्रॉड

गौरतलब है कि डिजिटल अरेस्ट असल में एक नया साइबर फ्रॉड तरीका बन चुका है. पिछले दो सालों से ये तेजी से बढ़ रहा है. इस तरह के फ्रॉड में ठग खुद को पुलिस, CBI, NIA या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं. फिर फोन या वीडियो कॉल पर उन्हें घंटों तक रोके रखते हैं और जांच या वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं.

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इस दौरान फ्रॉड्स विक्टिम को लगातार वीडियो कॉल पर रहने को मजबूर करते हैं ताकि वो पुलिस या किसी अपने को इनफॉर्म ना कर सके. इसी दौरान पैसे ट्रांसफर कराने का पूरा खेल होता है. 

पुलिस या एजेंसी कभी वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं करती

पुलिस का कहना है कि भारत में कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही किसी से पैसे ट्रांसफर करने को कहती है. अगर इस तरह का कोई कॉल आए तो तुरंत कॉल काट देना चाहिए और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए.

साइबर पुलिस के मुताबिक ऐसे मामलों में खास तौर पर बुजुर्ग लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. डर और घबराहट का फायदा उठाकर ठग लोगों से बड़ी रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं. इसलिए ऐसे कॉल आने पर सावधान रहने की जरूरत है.

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