scorecardresearch
 

20 सालों से दिखावे पर टिकी ह्यूमनॉयड रोबोट इंडस्ट्री, इंसानों जैसे एक्सप्रेशन छोड़िए, चल भी नहीं पा रहे हैं

रोबोट इंसानों जैसे ही क्यों दिखने चाहिए... क्या आपके मन में भी ये ख्याल कभी आया है? दरअसल पिछले एक दशक से लगातार कंपनियां दावा कर रही हैं कि वो इंसानों की तरह दिखने वाला रोबोट लाएंगी, लेकिन असलियत क्या है? स्टेज पर प्रेजेंटेशन में भी जो रोबोट दिखते हैं उन्हें स्टेज के पीछे से इंसान ही कंट्रोल कर रहा होता है.

Advertisement
X
Humanoid Robot का फ्यूचर क्या है?
Humanoid Robot का फ्यूचर क्या है?

अमेरिका के लास वेगास में आयोजित CES 2026 ने एक बार फिर दुनिया को अपनी चकाचौंध से हैरान कर दिया है. हर तरफ स्क्रीन, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का शोर है. लेकिन इस साल की सबसे बड़ी चर्चा 'Humanoid Robots' को लेकर है. 

टेक कंपनियां दावा कर रही हैं कि अब वो दिन दूर नहीं जब आपके घर का सारा काम एक इंसान जैसा दिखने वाला रोबोट करेगा. लेकिन अगर हम गहराई से सोचें और इस साल पेश किए गए प्रोटोटाइप्स का बारीकी से विश्लेषण करें, तो एक अलग ही तस्वीर सामने आती है. सच तो यह है कि ह्यूमनॉइड यानी इंसानों जैसे रोबोट्स का पूरा कॉन्सेप्ट ही गलत या फ्लॉड है, और यह हमारा फ्यूचर हो ही नहीं हो सकते. ठीक उसी तरह जैसे Flying Car. बचपन से हम फ्लाइंग कार के बारे में सुन रहे हैं, लेकिन अब तक एक फ्लाइंग कार ऐसी नहीं बनी जो सक्सेसफु हो. क्योंकि ड्रोन उससे बेहतर हो चुके हैं. 

Elon Musk तक इसमें हाथ आजमा चुके हैं, लेकिन अब तक उनका भी Humanoid रोबोट कुछ खास नहीं कर पाया. कई साल पहले ही मस्क ने कहा था कि ह्यूमनॉयड रोबोट मार्केट में अवेलेबल हो जाएंगे, लेकिन सच्चाई ये है कि स्टेज पर उन्होंने इंसान को ही रोबोटिक कपड़ा पहना दिया था. कई कंपनियां तो ह्यूमनॉयड रोबोट का डेमोंस्ट्रेशन सिमुलेशन के जरिए देती हैं. यानी कोई इंसान स्टेज के पीछे से रोबोट को कंट्रोल कर रहा होता है. ये ट्रेंड कई सालों से चल रहा है. 

Advertisement

20 साल का इंतजार और वही पुराना ढांचा...

अगर हम पीछे मुड़कर देखें, तो पिछले 10 से 20 सालों में ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स में कोई सिग्निफिकेंट बदलाव नहीं आया है. हम आज भी उसी बैलेंस और मूवमेंट की समस्या से जूझ रहे हैं जिससे हम 2005 में जूझ रहे थे. CES 2026 के स्टेज पर भी हमने देखा कि ये रोबोट्स बहुत ही संभल-संभल कर चलते हैं. दिखाने के स्टेज पर कंपनियां नकली ह्यूमनाइड रोबोट दिखाया जाता है, लेकिन असली रोबोट सिर्फ शो पीस की तरह होते हैं. इनकी चाल में वो स्वाभाविकता नहीं है जो एक इंसान में होती है. इतने सालों की रिसर्च एंड डेवेलपमेंट के बाद ये रोबोट्स ठीक से चल भी नहीं पाते हैं. 

हकीकत यह है कि इंसान की तरह दो पैरों पर चलना इंजीनियरिंग के लिहाज से सबसे खराब डिजाइन चॉइस है. दो पैरों पर बैलेंस बनाना कंप्यूटर के लिए एक 'कंप्यूटेशनल नाइटमेयर' है. जब हमारे पास पहिए  और स्टेबल बेस जैसे विकल्प मौजूद हैं, तो फिर करोड़ों रुपये खर्च करके एक ऐसी मशीन बनाना जो हर कदम पर गिरने का खतरा महसूस करे, समझदारी नहीं लगती.

क्यों इंसानों जैसे हाथ-पैर एक बड़ी रुकावट हैं?

कंपनियां अक्सर तर्क देती हैं कि चूंकि हमारी दुनिया इंसानों के हिसाब से बनी है, इसलिए रोबोट्स को भी इंसान जैसा होना चाहिए. लेकिन क्या वाकई? एक रोबोटिक हाथ जिसमें पांच उंगलियां हों, उसे किसी चीज को पकड़ने के लिए हजारों लाइन के कोड और दर्जनों सेंसर्स की जरूरत होती है. वहीं, एक स्पेशलाइज्ड ग्रिपर या सक्शन कप उसी काम को 100 गुना ज्यादा सटीकता और कम बिजली खर्च करके कर सकता है. तो फिर हाथ पैर वाले रोबोट ही क्यों चाहिए?

Advertisement

इंसानी पैरों की तुलना में पहिए वाले रोबोट ज्यादा तेज होते हैं, ज्यादा वजन उठा सकते हैं और कभी थकते नहीं हैं. ह्यूमनॉइड रोबोट्स के साथ सबसे बड़ी समस्या उनकी कॉम्पेक्सिटी है. जितने ज्यादा मूविंग पार्ट्स होंगे, मशीन के खराब होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी. क्या आप वाकई एक ऐसा रोबोट घर लाना चाहेंगे जिसे हर हफ्ते रिपेयर की जरूरत पड़े?

ट्रिकी यूज और आम आदमी की पहुंच से बाहर!

ह्यूमनॉइड रोबोट्स का यूजर एक्सपीरिएंस काफी जटिल है. इन्हें ऑपरेट करना एक आम आदमी के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है. इनके साथ सेफ्टी रिस्क्स भी बहुत ज्यादा हैं. कल्पना कीजिए कि 70-80 किलो का एक भारी भरकम लोहे का रोबोट बैलेंस बिगड़ने की वजह से आपके बच्चे या आपके फर्नीचर पर गिर जाए तो क्या होगा?

हां.. रोबोट जैसे.. होम क्लीनिंग रोबोट्स .. जैसे कि वैक्यूम क्लीनर रोबोट.. का फ्यूचर काफी ब्राइट है. इन्हें बस ऑन कर दीजिए, और ये अपना काम बखूबी करते हैं. इन्हें किसी की मदद की जरूरत नहीं होती क्योंकि इन्हें इंसान जैसा दिखने के लिए नहीं, बल्कि एक टास्क को पूरा करने के लिए बनाया गया है. घर को झाड़ू पोछा लगाने के साथ ही ये अपना डॉक स्टेशन खुद से साफ कर देते हैं और अब तो स्टेयर्स चढ़ने वाले क्लीनिंग रोबोट्स भी बन रहे हैं. सोचिए अगर झाड़ू पोछे लगाने के लिए इंसानों जैसा रोबोट बनाया जाए तो क्या होगा? 

Advertisement

CES 2026 में एक कपड़े धोने वाला रोबोट दिखा, वो कपड़े खुद से नहीं धोता बल्कि धीरे धीरे आपके कमरे से कपड़े उठा कर वॉशिंग मशीन में डालने का काम करता है. ये अपने आप में काफी फनी है. 

स्पेशलाइज्ड रोबोट्स: असली क्रांति यहीं है...

आज मेडिकल के क्षेत्र में सर्जरी करने वाले रोबोट्स कमाल कर रहे हैं. इंडस्ट्रीज में असेंबली लाइन पर लगे रोबोट्स इंसानों से हजार गुना बेहतर काम कर रहे हैं. इन सभी रोबोट्स में एक चीज कॉमन है, ये इंसान जैसे नहीं दिखते.

Medical Robots: इन्हें सिर्फ सटीकता और स्थिरता चाहिए, पैर नहीं.

Cleaning Robots: इन्हें सिर्फ जमीन के करीब रहना है और कचरा साफ करना है, इन्हें चेहरे या हाथों की जरूरत नहीं है.

Warehouse Robots: ये भारी सामान उठाने के लिए बने हैं, इसलिए इनका डिजाइन चौकोर और मजबूत होता है.

इन रोबोट्स की सफलता का कारण यह है कि ये पर्पस ड्रिवेन हैं. ये दिखावे के लिए नहीं, काम के लिए बने हैं. इन्हें इंसानों जैसा दिखने की कोई जरूरत नहीं है. 

CES 2026 का सच: सिर्फ मार्केटिंग का तमाशा?

CES 2026 में अनवील किए गए नए मॉडल्स को देखकर ऐसा लगता है कि कंपनियां सिर्फ अपनी AI कैपिब्लिटी का प्रदर्शन करने के लिए ह्यूमनॉइड बॉडी का सहारा ले रही हैं. यह एक प्रकार का मार्केटिंग गिमिक ज्यादा लगता है. क्या वाकई हमें एक ऐसे रोबोट की जरूरत है जो चलकर आए और हमें पानी का गिलास दे? क्या एक छोटा सा स्मार्ट ट्रॉल-बॉट  वही काम ज्यादा सुरक्षित और सस्ते तरीके से नहीं कर सकता?

Advertisement

इंसान जैसा रोबोट बनाने की जिद हमारी अपनी ईगो को को सैटिसफाई करने जैसा है. हम खुद को क्रिएटर के रूप में देखना चाहते हैं, लेकिन प्रैक्टिकल दुनिया में इसकी कोई जगह नहीं है. ह्यूमनॉइड रोबोट्स हमेशा एक नीश प्रोडक्ट या रिसर्च का हिस्सा ही रहेंगे. अगले 10-20 सालों में भी इनमे ज्यादा बदलाव नहीं होगा. 

फ्यूचर रोबोट्स इंसानों जैसे नहीं, लेकिन स्मार्ट और पावरफुल होंगे

हमें ये मानना होगा कि रोबोटिक्स का फ्यूचर ह्यूमनॉयड रोबोट्स नहीं हैं. भविष्य उन मशीनों का है जो इनविजिबल रहकर हमारे काम को आसान बनाएं. हमें ऐसे रोबोट चाहिए जो कम बिजली खाएं, सुरक्षित हों और अपने काम में माहिर हों.

ह्यूमनॉइड रोबोट एक ऐसा कॉन्सेप्ट है जो दशकों से प्रैक्टिकल नहीं हो पाया है, लेकिन हर साल कुछ ना कुछ डेवेलपमेंट देखने को मिल रहा है. हालांकि वैसे रोबोट्स जो इंसानों की तरह नहीं दिखते वो इन दिनों तमाम इंडस्ट्रीज में बड़ा रोल अदा कर रहे हैं. प्रोडक्ट मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर पैकेजिंग और असेंब्ली तक सबकुछ सटीक. मेडिकल फील्ड में भी रोबोटिक्स आगे जाएगा, लेकिन इंसानों जैसे दिखने वाले रोबोट्स सिर्फ म्यूजियम में पाए जा सकते हैं, हर घर में नहीं. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement