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दुनिया का सबसे छोटा कंप्यूटर लगा कर तैयार किया AI हेलमेट, ऐसे डिटेक्ट करता है रियल टाइम ट्रैफिक वायलेशन

AI Helmet: इस हेलमेट में लगा है दुनिया का सबसे छोटा कंप्यूटर Raspberry Pie. ये हेलमेंट रियल टाइम ट्रैफिक वायलेशन डिटेक्ट करके पुलिस को भेज सकता है. इसमें कैमरा और AI भी है.

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AI हेलमेट (फोटो: पंकज तंवर/X)
AI हेलमेट (फोटो: पंकज तंवर/X)

बेंगलुरु में ट्रैफिक कोई नई परेशानी नहीं है. सुबह ऑफिस टाइम हो या शाम का पीक आवर, लाल बत्ती तोड़ते वाहन, बिना हेलमेट बाइक चलाते लोग और गलत साइड से घुसती गाड़ियां आम नज़ारा हैं. 

लोग गुस्सा करते हैं, सोशल मीडिया पर वीडियो डालते हैं, फिर अगली सुबह वही कहानी दोहराई जाती है. लेकिन इसी शहर में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने इस रोज़ की परेशानी को एक अलग नजर से देखा और अपना हेलमेट ही ट्रैफिक निगरानी की मशीन बना डाला. 

इस इंजीनियर का नाम पंकज तंवर है. रोज़ बाइक से ऑफिस जाते वक्त जो कुछ वह देखता था, वही उसका आइडिया बन गया. उसने सोचा, अगर सड़क पर ही कोई ऐसा सिस्टम हो जो नियम तोड़ते ही उसे पकड़ ले और सबूत के साथ पुलिस तक पहुंचा दे, तो शायद लोगों का व्यवहार बदले. इसी सोच से उन्होंने AI Helmet बना दिया. 

AI Helmet

बाहर से यह एक आम हेलमेट जैसा दिखता है, लेकिन अंदर कैमरा है, लोकेशन सिस्टम (GPS) है और एक छोटा सा कंप्यूटर है. इस हेलमेट में Raspberry Pie यूज किया गया है जिसे दुनिया का सबसे छोटा कंप्यूटर भी कहा जाता है. 

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 इस हेलमेट में जो कैमरा लगा है उसका वीडियो Raspberry Pie रियलटाइम में मॉनिटर करता है. वीडियो देखकर समझ सकता है कि सामने वाला हेलमेट पहने है या नहीं, नंबर प्लेट ढकी है या नहीं, या गाड़ी गलत साइड चल रही है या नहीं. जैसे ही कोई नियम टूटता है, हेलमेट उस पल की तस्वीर और जगह की जानकारी सेव करता है और रिपोर्ट तैयार कर देता है.

ये हेलमेट मोबाइल हॉट स्पॉट के साथ कनेक्ट होता है और रियल टाइम मॉनिटरिंग करता है. चूंकि इसके अंदर एक छोटा कंप्यूटर लगा है, इसलिए तमाम रिकॉर्ड किए गए फूटेज डायरेक्ट पुलिस के पोर्टल पर सेंड किया जा सकता है. 

पंकज ने जब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर डाला, तो लोगों को पहले तो लगा कोई मजाक है. लेकिन जैसे ही उसने दिखाया कि सिस्टम रियल टाइम में उल्लंघन पहचान रहा है, पोस्ट वायरल हो गया. कुछ लोगों ने इसे जुगाड़ कहा, कुछ ने इसे भविष्य की ट्रैफिक पुलिस बताया. कई यूज़र्स ने लिखा कि अगर ऐसा सिस्टम आम लोगों के पास आ जाए तो सड़कों पर डर अपने आप आ जाएगा.

ट्रैफिक पुलिस ने दिखाई दिलचस्पी

दिलचस्प बात यह है कि यह कहानी सिर्फ इंटरनेट तक सीमित नहीं रही. बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस ने भी इस आइडिया में दिलचस्पी दिखाई. शहर में पहले से हजारों कैमरे लगे हैं, लेकिन हर गली और हर मोड़ पर कैमरा नहीं हो सकता. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर ऐसा मोबाइल सिस्टम सही तरीके से काम करे, तो यह उन इलाकों में मदद कर सकता है जहां कैमरे नहीं हैं.

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पंकज ने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया है. यहां देखा जा सकता है कि बेंगलुरु पुलिस खुद उसे मैसेज करके इस बारे में विस्तार जानना चाह रही है.

पंकज का कहना है कि उसका मकसद किसी को परेशान करना नहीं है. वह बस चाहता है कि नियम तोड़ना आसान न रहे. अभी सिस्टम शुरुआती स्टेज पर है. वह खुद मानता है कि इसमें सुधार की जरूरत है, जैसे गलत पहचान की संभावना कम करना और डेटा को सुरक्षित तरीके से हैंडल करना. लेकिन आइडिया लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है.

प्राइवेसी पर पड़ेगा असर?

यहां एक दूसरा पहलू भी है. कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या हर किसी को ऐसे कैमरे लेकर घूमना चाहिए. क्या इससे प्राइवेसी पर असर पड़ेगा. क्या कोई इस सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर सकता है. ये सवाल सही हैं और इन्हीं पर भविष्य तय होगा कि यह तकनीक सड़क तक पहुंचेगी या लैब और सोशल मीडिया तक ही सीमित रहेगी.

लेकिन एक बात साफ है. यह हेलमेट सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि एक सोच है. वह सोच जो कहती है कि ट्रैफिक नियम सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी हैं. जब आम आदमी तकनीक के सहारे नियमों को गंभीरता से लेने लगे, तो शायद सड़कें थोड़ी सुरक्षित हो जाएं.

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आज यह हेलमेट एक इंजीनियर के शौक का नतीजा है. कल यह किसी स्टार्टअप का प्रोडक्ट बन सकता है. और परसों शायद हर बड़े शहर की ट्रैफिक रणनीति का हिस्सा. क्योंकि AI के इस दौर में इनोवेशन भी तेजी से हो रहा है. 

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