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आजादी के 75 साल: स्वतंत्रता मिलने के महज इतने साल बाद ही देश में आ गया था कंप्यूटर, अभी भारत है बड़ा हब

आज़ादी के 75 साल हो गए हैं. कंप्यूटर के मामले में हम ने जीरो से शुरुआत की थी. अब इसमें हम काफी आगे हैं. भारत में कंप्यूटर क्रांति का सूत्राधार राजीव गांधी को माना जाता है. जवाहर लाल नेहरू ने देश के पहले कंप्यूटर का नाम TIFRAC रखा था. जानिए ऐसी ही रोचक तथ्य.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

कंप्यूटर के बिना आज ज्यादातर काम ठप हो जाएंगे. स्मार्टफोन और कंप्यूटर के बिना लाइफस्टाइल की कल्पना नहीं की जा सकती है. इससे हमारा काम काफी आसान हो गया है. हमें आजादी मिले 75 साल हो गए. इस अवसर पर आजादी का अमृत महोत्सव भी मनाया जा रहा है. 

ऐसे में भारत में किस तरह कंप्यूटर का विकास हुआ और तब से अब तक ये कितना बदल गया है. इसकी पूरी जानकारी यहां पर दे रहे हैं. 

भारत में पहला कंप्यूटर 

इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट कोलकाता से भारत में कंप्यूटर की शुरुआत हुई. यहां पर ही देश का पहला कंप्यूटर लगाया गया था. साल 1955 के आखिरी में इसे लगाया गया था. यानी आजादी के मात्र 8 साल बाद देश में पहला कंप्यूटर आ चुका था. 

इसका नाम था HEC-2M. इसे आज की तरह टेबल पर रख कर काम में यूज नहीं किया जा सकता था. इसके साइज का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसे इंग्लैंड से जहाज के जरिए दो रैक में भर कर लाया गया था. इसको इंस्टॉल करने में करीब दो महीने का समय लग गया था. हालांकि, आम लोग अभी भी इससे दूर थे. इसे वहां के रिसर्चर यूज करते थे. 

कैलकुलेशन फास्ट करने के लिए बना था कंप्यूटर

कंप्यूटर को कैलकुलेशन तेजी से करने के लिए तैयार किया गया था. हालांकि, पर्सनल कंप्यूटर को सबसे पहले IBM ने साल 1975 में तैयार किया था. ये पहले से बनाये जा रहे कंप्यूटर से काफी सस्ता और हल्का हुआ करता था. 

भारत का पहला कंप्यूटर

देश का पहला कंप्यूटर TIFRAC यानी टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च आटोमेटिक कैलकुलेटर था. इसका नाम देश के प्रभावशाली और पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रखा था. इसको साल 1956 में काम के लिए उपयोग में लाया गया. 

इसके बाद साल 1966 में देश का पहला सॉलिड स्टेट डिजिटल कंप्यूटर ISIJU-1 को डेवलप किया गया. इसे भारतीय सांख्यिकी संस्थान और कोलकाता की जादवपुर यूनिवर्सिटी की साझेदारी से तैयार किया गया था. इसकी खास बता थी कि इसमें ट्रांजिस्टर का भी उपयोग किया गया था. 

कंप्यूटर क्रांति के जनक राजीव गांधी 

भारत में राजीव गांधी को कंप्यूटर क्रांति का जनक कहा जाता है. उन्होंने कंप्यूटर को हर घर पहुंचाने की कोशिश की. राजीव गांधी के वक्त ही नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर की स्थापना भी हुई थी. MTNL और VSNL की शुरुआत भी इसके कार्यकाल के दौरान हुई. 

हर घर कंप्यूटर पहुंचाने के लिए राजीव गांधी ने कंप्यूटर से सरकार का कंट्रोल हटा दिया. इसके बाद पूरी तरह से एसेंबल किए गए कंप्यूटर का इम्पोर्ट देश में शुरू हो गया. ये एक बड़ा कारण बना जिससे कंप्यूटर का दाम होने लगा और आम लोग की पहुंच में ये आने लगा. 

1991 बाद आई तेजी

सरकार की मदद से प्राइवेट सेक्टर कंपनियों ने सॉफ्टवेयर डेवलप करना शुरू किया. रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम में भी इसका इस्तेमाल किया गया. इसमें सरकार को अभूतपूर्व सफलता मिली. इसको देखते हुए बाकी क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल पर जोर दिया गया. 

भारत अब कंप्यूटर और मोबाइल के लिए काफी बड़ा बाजार बन गया है. इस वजह से कई टेक कंपनियां भारत में खास लॉन्च इवेंट भी रखती है. अब ये डेटा का भी काफी बड़ा हब बन गया है. डेटा सस्ता होने की वजह हर हाथ में मोबाइल है. 

लॉकडाउन के समय बढ़ गई लैपटॉप की मांग

कोरोना से समय लगे लॉकडाउन में लैपटॉप की डिमांड में तेजी देखने को मिली. ऑफिस का काम हो या ऑनलाइन पढ़ाई, दोनों में लैपटॉप या कंप्यूटर का काफी यूज किया गया. एक रिपोर्ट के अनुसार, हाइब्रिड वर्क कल्चर का चलन और ऑनलाइन स्टडी काफी तेजी से बढ़ा. इसमें लोगों को लैपटॉप और दूसरे डिवाइस की जरूरत महसूस हुई. 

 

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