इन दिनों अमेरिकी टेक कंपनी Anthropic भारत में चर्चा में है. हाल ही में कंपनी ने भारत में अपना ऑफिस खोलने का ऐलान किया है. ये वही कंपनी है जो अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर के लिए AI सर्विसेज देती है.
कर्नाटक के बेलगावी की एक लोकल सॉफ्टवेयर कंपनी ने अमेरिका की बड़ी AI कंपनी Anthropic के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
मामला कंपनी के नाम को लेकर है. बेलगावी की कंपनी का दावा है कि वह साल 2017 से Anthropic Software Private Limited नाम से रजिस्टर्ड है. वहीं अमेरिका की AI कंपनी Anthropic PBC की शुरुआत 2021 में हुई थी.
अब नाम एक जैसा होने की वजह से लोकल कंपनी को पहचान और बिजनेस में नुकसान होने का आरोप लगाया गया है.
मामला बेलगावी की जिला और वाणिज्यिक अदालत में दर्ज किया गया है. याचिकाकर्ता मोहम्मद अय्याज मुल्ला ने कोर्ट को बताया कि उनकी कंपनी अमेरिका वाली Anthropic से कई साल पहले बनी थी. इसके बावजूद अब ग्लोबल AI कंपनी के नाम की वजह से उनकी पहचान धुंधली हो रही है.
उनका कहना है कि निवेशकों और ग्राहकों में कन्फ्यूजन हो रहा है. कई बार लोगों को लगता है कि दोनों कंपनियां एक ही हैं या आपस में जुड़ी हुई हैं.
इस केस की सुनवाई 16 फरवरी को तय थी, लेकिन अमेरिकी कंपनी Anthropic PBC के रिप्रेंजेंटेटिव अदालत में पेश नहीं हुए. इसके बाद प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड कमर्शियल कोर्ट ने कंपनी को फिर से समन भेजा है.
कोर्ट ने अमेरिका स्थित कंपनी के बेंगलुरु हेडक्वॉर्टर में मौजूद अधिकारियों को 9 मार्च को पेश होने का निर्देश दिया है.
कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक यह केस Anthropic Software Private Limited, Belagavi बनाम Anthropic PBC, San Francisco के नाम से दर्ज है. लोकल कंपनी का कहना है कि उनका नाम और पहचान ही उनका सबसे बड़ा एसेट है. अगर यह पहचान कमजोर होती है तो छोटे स्टार्टअप के लिए सर्वाइव करना मुश्किल हो जाता है.
मोहम्मद अय्याज मुल्ला का कहना है कि उनकी कंपनी एक 2017 की सॉफ्टवेयर स्टार्टअप है. उन्होंने कहा कि नाम की वजह से उन्हें निवेश और कस्टमर दोनों लेवल पर दिक्कतें आ रही हैं.
उनका आरोप है कि ब्रांड कन्फ्यूजन की वजह से उनके बिजनेस पर असर पड़ रहा है. इसलिए उन्होंने कोर्ट से अपने लीगल राइट्स की सुरक्षा की मांग की है.
यह मामला सिर्फ दो कंपनियों के बीच नाम की लड़ाई नहीं है. यह छोटे भारतीय स्टार्टअप्स की पहचान और ब्रांड वैल्यू से जुड़ा बड़ा सवाल भी खड़ा करता है.
ग्लोबल AI कंपनियों के आने के बाद कई लोकल कंपनियों को ब्रांड और नाम से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. अब देखना होगा कि कोर्ट इस नाम विवाद पर क्या फैसला देता है और लोकल कंपनी को कितनी राहत मिलती है.