ईरान के दक्षिणी शहर मिनाब में 28 फरवरी 2026 को जो हुआ, उसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया. अमेरिका ने एक लड़कियों के प्राइमरी स्कूल पर मिसाइल दागी और इससे 160 से ज्यादा बच्चियों की मौत हो गई.
ये हमला उस वक्त हुआ जब क्लास चल रही थी और स्कूल में 7 से 12 साल की उम्र की सैकड़ों छात्राएं मौजूद थीं. इस घटना को अब 2026 के ईरान युद्ध की सबसे घातक घटनाओं में से एक माना जा रहा है.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक स्कूल कैसे टारगेट बन गया? इससे बेसिक तीन सवाल उठते हैं.
पहला सवाल.. क्या जानबूझ कर किया गया अटैक था?
दूसरा सवाल.. क्या यह सिर्फ युद्ध की अफरा-तफरी में हुई गलती थी?
तीसरा सवाल.. क्या युद्ध में इस्तेमाल हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने कहीं कोई बड़ी गलती कर दी?
जवाब चाहे जो भी हो वो जांच का विषय है, लेकिन हम यहां ये समझने की कोशिश करेंगे कि इस तरह की गलती AI कर सकता है. इतिहास में पहली बार किसी जंग में इस लेवल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यूज हुआ है.
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बता दें कि अमेरिकी सरकार Anthropic और Open AI जैसी कंपनियों के साथ करार करती रही है ताकि जंग में AI का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जा सके.
रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस स्कूल को निशाना बनाया गया वह शाजारेह तैय्यबेह गर्ल्स स्कूल था. यह हमला उस दिन हुआ जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए थे. ईरान का दावा है कि इस हमले में 168 से 180 लोगों की मौत हुई जिनमें ज्यादातर स्कूली बच्चियां थीं.
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि वे जानबूझकर किसी स्कूल को निशाना नहीं बनाते और इस मामले की जांच की जा रही है. बाद में कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी माना कि संभव है कि हमला अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का हिस्सा रहा हो, हालांकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है.
जांच में यह भी सामने आया कि जिस जगह स्कूल था, वहां कभी ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) का बेस हुआ करता था. कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि हमला शायद उसी सैन्य परिसर को निशाना बनाकर किया गया था जो स्कूल के बिल्कुल पास था.
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यहीं से सवाल उठता है.... अगर टारगेट सैन्य ठिकाना था तो मिसाइल स्कूल पर कैसे गिर गई?
आज की लड़ाइयों में टारगेट चुनने का काम सिर्फ इंसान नहीं करते. अमेरिका और इज़रायल जैसी सेनाएं बड़े पैमाने पर AI बेस्ड टार्गेटेड सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं. इन सिस्टम्स का काम सैटेलाइट तस्वीरों, ड्रोन फीड, फोन लोकेशन और डेटा एनालिसिस के आधार पर यह तय करना होता है कि हमला कहां करना है.
AI हजारों संभावित टारगेट का विश्लेषण करके सेकंडों में यह तय कर सकता है कि कौन-सी इमारत या लोकेशन सैन्य ठिकाना हो सकती है. यही वजह है कि आधुनिक युद्ध को अब कई विशेषज्ञ 'एल्गोरिद्म वारफेयर' कहने लगे हैं.
लेकिन समस्या यह है कि AI जितना तेज है, उतना ही जोखिम भरा भी हो सकता है.
अगर मिनाब हमले को तकनीकी नजरिए से देखें तो कई संभावनाएं सामने आती हैं.
पहली संभावना है गलत डेटा या पुरानी जानकारी. अगर AI सिस्टम को यह जानकारी मिली हो कि उस इलाके में अभी भी सैन्य बेस मौजूद है, तो वह उसी आधार पर टारगेट चुन सकता है. जबकि असलियत में वहां कई साल पहले स्कूल बन चुका था.
दूसरी संभावना है टारगेट के आसपास की इमारतों का गलत विश्लेषण. कई बार सैन्य ठिकाने और नागरिक इमारतें एक ही इलाके में होती हैं. अगर AI एल्गोरिद्म ने पूरे परिसर को सैन्य क्षेत्र मान लिया हो, तो मिसाइल सीधे स्कूल पर गिर सकती है.
तीसरी संभावना है ऑटोमेटेड टारगेटिंग का ओवर-रिलायंस. कई आधुनिक हथियारों में टारगेट चुनने के बाद अंतिम फैसला इंसान की बजाय एल्गोरिद्म और ऑटोमेटेड सिस्टम लेते हैं. अगर उस प्रक्रिया में मानवीय जांच कम हो जाए तो गलती की संभावना बढ़ जाती है.
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गाजा युद्ध के दौरान भी इज़राइल पर आरोप लगे थे कि उसने AI आधारित सिस्टम Lavender का इस्तेमाल कर हजारों टारगेट की सूची तैयार की थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक उस सिस्टम की सटीकता पर भी सवाल उठे थे और कई बार गलत टारगेट चुने गए.
यही वजह है कि विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी दे रहे हैं कि अगर युद्ध में AI को पूरी तरह खुली छूट मिल गई तो इंसानी कंट्रोल कमजोर पड़ सकता है.
मिनाब में जो हुआ उसका सच अभी जांच के बाद ही सामने आएगा. लेकिन इतना साफ है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ सैनिकों और हथियारों का नहीं रहा. इसमें एल्गोरिद्म, डेटा और मशीन लर्निंग भी शामिल हो चुके हैं. मशीन का गलती करना लाजमी है और एक गलती भारी पड़ सकती हैं.
अगर टारगेटिंग सिस्टम में जरा सी भी गलती हो जाए, या गलत डेटा फीड हो जाए, तो उसका नतीजा वही हो सकता है जो मिनाब में हुआ... जहां क्लास में बैठी बच्चियों पर मिसाइल गिर गई.
युद्ध में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन मिनाब जैसी घटनाएं यह सवाल जरूर उठाती हैं कि क्या मशीनों को जीवन और मौत का फैसला करने देना सुरक्षित है. सच्चाई फिलहाल किसी को नहीं पता कि ये हमला जानबूझ कर स्कूल पर किया गया था या मशीन की वजह से हुआ.