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टेक न्यूज़

Pegasus से iPhone भी नहीं है सेफ, जासूसी सॉफ्टवेयर पर WhatsApp CEO ने भी बड़ी बात कही

FB Pegasus
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Pegasus एक बार फिर से चर्चा में है. मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार Pegasus स्पाईवेयर यूज करके पत्रकरों, एक्टिविस्ट और कई लोगों पर नजर रखी जा रही है. Pegasus को इजरायली कंपनी NSO Group ने बनाया है. इससे WhatsApp चैट्स को भी पढ़ा जा सकता है. इस पर अब WhatsApp के सीईओ ने बयान दिया है. 

WhatsApp Head Tweet
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Pegasus काफी एडवांस और पावरफुल सॉफ्टवेयर है. इसकी मदद से लोगों की जासूसी की जा सकती है. Apple लगातार दावा करता रहा है कि iPhones सबसे सेफ डिवाइस है लेकिन Pegasus से iPhones और Android दोनों को टारगेट किया जा सकता है.

WhatsApp
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इस न्यूज पर WhatsApp के हेड Will Cathcart सामने आए हैं. उन्होंने कहा है NSO Group का खतरनाक स्पाईवेयर का इस्तेमाल दुनियाभर में मानवाधिकारों के हनन के लिए किया जा रहा है. इसे रोकने की जरूरत है. इसको लेकर Will Cathcart कई ट्वीट्स किए हैं. उन्होंने बताया है किस तरह WhatsApp 2019 में NSO के टूल से लड़ा था. 

WhatsApp Hack
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उन्होंने आगे कहा है ये मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के अंजान वल्नेरेबिलिटी पर डिपेंड करता है. इस वजह से इसको लेकर जागरूकता फैलाना जरूरी है. उन्होंने कहा 2019 में 100 से ज्यादा केस 20 देशों में इसके जरिए पत्रकारों और ह्यूमन राइट डिफेंडर को टारगेट करने वाले आए थे. रिपोर्ट दिखाता है इस बार ये काफी बड़े पैमाने पर हो रहा है. 

WhatsApp
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उन्होंने दावा किया है लोगों का प्राइमरी डिवाइस स्मार्टफोन है. इंटरनेट सिक्योरिटी को बढ़ाने के लिए कंपनी और सरकार को हरसंभव प्रयास करने चाहिए. हमारी सिक्योरिटी फ्रीडम इस पर ही डिपेंड करती है. 

WhatsApp
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Kaspersky ने 2017 में बताया कि Pegasus काफी हाई रेटिंग वाला स्पाईवेयर या मॉड्यूलर मैलवेयर है. इसको लेकर कई रिपोर्ट सामने आई है. इस टूल को टारगेट डिवाइस में बस एक मिसकॉल से भी इंस्टॉल किया जा सकता है. 

Will Cathcart
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Pegasus से लेटेस्ट आईफोन भी सेफ नहीं है. AmnestyTech की रिपोर्ट के अनुसार iOS 14.6 डिवाइस को भी हैक करके Pegasus सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार NSO Group लेटेस्ट आईफोन को भी ब्रेक कर सकते हैं. 

WhatsApp
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Pegasus को लेकर अभी काफी चर्चा हो रही है. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक कई देशों की सरकार इसको यूज कर रही हैं. इसके जरिए पत्रकारों और एक्टिविस्ट को टारगेट किया जा रहा है.