
पाकिस्तान सरकार ने पिछले दिनों अफगानियों समेत सभी अवैध शरणार्थियों को 1 नवंबर तक देश छोड़ने का अल्टीमेटम दिया था. अफगानिस्तान सरकार ने पाकिस्तान के इस फैसले पर नाराजगी जाहिर करते हुए अस्वीकार्य बताया था. पाकिस्तान के इस आदेश का बदला अफगानिस्तान की टीम ने क्रिकेट के मैदान पर लिया. अफगानिस्तान ने भारत में खेले जा रहे क्रिकेट वर्ल्ड कप (2023) में पाकिस्तान को 8 विकेट से करारी हार दी.
अफगानिस्तान के बल्लेबाज इब्राहिम जादरान को पाकिस्तान के खिलाफ अपने शानदार प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' अवार्ड मिला. जादरान ने 87 रन की पारी खेली. जादरान ने इस अवार्ड को अपने देश के लोगों के साथ-साथ पाकिस्तान से निकाले जा रहे अफगान शरणार्थियों को समर्पित किया. जादरान ने मैच के बाद 'प्लेयर ऑफ द मैच' अवार्ड लेने के बाद कहा, "मैं इस मैन ऑफ द मैच को उन लोगों को समर्पित करना चाहता हूं जिन्हें पाकिस्तान से वापस घर अफगानिस्तान भेजा जा रहा है.''

जादरान का ये बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. जादरान के बयान को पाकिस्तान द्वारा शरणार्थियों को 1 नवंबर तक देश छोड़ने के अल्टीमेटम का जवाब माना जा रहा है. हालांकि, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स उनकी इस भावना को लेकर उनकी तारीफ कर रहे हैं. जबकि कुछ यूजर्स ने उनकी तुलना पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहम्मद रिजवान से की. रिजवान ने वर्ल्ड कप में ही श्रीलंका के खिलाफ जीत के बाद अपने शतक को फिलिस्तीन के लोगों को समर्पित किया था.
क्या है पाकिस्तान का आदेश?
दरअसल, पाकिस्तान में पिछले कुछ सालों में आतंकी हमलों में इजाफा हुआ है. भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों को पनाह देने वाला पाकिस्तान अपनी जमीन पर होने वाले इन हमलों का ठीकरा अफगानिस्तान के सिर पर फोड़ता रहा है. पाकिस्तान में पिछले महीने पैगंबर मोहम्मद की जयंती पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में दो धमाके हुए थे. इन धमाकों में 60 लोगों की मौत हुई.
इन हमलों के बाद पाकिस्तान की अंतरिम सरकार ने अवैध प्रवासियों को चेतावनी दी थी कि वे 1 नवंबर तक देश छोड़ दें, नहीं तो उन्हें निकालने की कार्रवाई की जाएगी. पाकिस्तान में अवैध प्रवासियों में करीब 17 लाख अफगान नागरिक हैं. पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार के गृहमंत्री सरफराज बुगती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था, बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे प्रवासी अक्टूबर के अंत तक खुद अपने देश वापस चले जाएं. नहीं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा. इतना ही नहीं उन्होंने कहा था कि अवैध प्रवासियों के कारोबार और संपत्तियों को भी सरकार जब्त कर लेगी.

पाकिस्तान के इस फैसले पर कुछ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चिंता भी जताई है. वहीं, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए पुनर्विचार के लिए कहा था. अमेरिका ने भी पाकिस्तान से अफगान शरणार्थियों को प्रवेश की अनुमति देन की अपील की है.
पाकिस्तान सरकार के फैसले के बाद अफगान शरणार्थियों को देश से बाहर भी निकाला जाने लगा है. अब तक 50 हजार से ज्यादा शरणार्थियों को पाकिस्तान से बाहर कर दिया गया. इब्राहिम जादरान ने अपना अवार्ड पाकिस्तान से बाहर निकाले जा रहे अफगानियों को समर्पित किया.
पाकिस्तान कैसे पहुंचे अफगान शरणार्थी?
अफगानिस्तान के लोगों के पाकिस्तान पहुंचने की शुरुआत साल 1979 से हुई. तब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर हमला किया था. इस हमले में जान बचाने के लिए लाखों अफगानियों ने पाकिस्तान का रुख किया था. सोवियत संघ के हमले के बाद करीब 50 लाख अफगानियों ने अपना देश छोड़ दिया. इनमें से ज्यादातर पाकिस्तान गए, जबकि कुछ पश्चिमी देशों में भी पहुंचे.
वहीं, अफगानिस्तान से दूसरा बड़ा विस्थापन 2021 में हुआ. जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया. UN के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 80 लाख से ज्यादा अफगानी देश छोड़ चुके हैं, जबकि लगभग साढ़े 3 लाख लोग अपने ही देश में विस्थापितों की तरह जी रहे हैं.
UN के मुताबिक, पाकिस्तान में 1.3 मिलियन अफगानियों ने खुद को रजिस्टर करवा रखा है. ये वैध शरणार्थी हैं. जबकि अवैध रूप से रह रहे शरणार्थियों की आबादी 17 लाख के लगभग है.