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किसान के बेटे, 19 साल में बने आर्मी अफसर, जानें कौन हैं टोक्यो में गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा

टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा ने इतिहास रच दिया है. जिस गोल्ड की सभी को लंबे समय से दरकार थी, वो आस आज नीरज चोपड़ा ने जेवलिन में पूरी कर दी है. शानदार प्रदर्शन करते हुए नीरज ने सभी खिलाड़ियों को पछाड़ दिया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया.

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नीरज चोपड़ा 7 अगस्त को फाइनल खेलेंगे. (फोटो-PTI) नीरज चोपड़ा 7 अगस्त को फाइनल खेलेंगे. (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पानीपत के रहने वाले हैं नीरज
  • 19 साल में आर्मी में अफसर बने
  • जैवलिन थ्रो में कई गोल्ड जीते

टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा ने इतिहास रच दिया है. जिस गोल्ड की सभी को लंबे समय से दरकार थी, वो आस आज नीरज चोपड़ा ने जेवलिन में पूरी कर दी है. शानदार प्रदर्शन करते हुए नीरज ने सभी खिलाड़ियों को पछाड़ दिया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया.

नीरज ने फाइनल में अपना दबदबा लगातार कायम रखा और पहले ही थ्रो में भाला 87 मीटर दूर फेंक दिया. इसके बाद दूसरी थ्रो में उन्होंने अपना ही प्रदर्शन सुधारते हुए 87 मीटर से भी दूर भाला फेंक दिया. अब आखिर में सभी को पछाड़ते हुए वे गोल्ड मेडल जीत गए हैं.

हरियाणा के हैं नीरज चोपड़ा

हरियाणा के पानीपत जिले के खांद्रा गांव में एक छोटे से किसान के घर पर 24 दिसंबर 1997 को नीरज का जन्म हुआ था. नीरज ने अपनी पढ़ाई चंडीगढ़ से की. नीरज ने 2016 में पोलैंड में हुए IAAF वर्ल्ड U-20 चैम्पियनशिप में 86.48 मीटर दूर भाला फेंककर गोल्ड जीता था, जिसके बाद उन्हें आर्मी में जूनियर कमिशन्ड ऑफिसर के तौर पर नियुक्ति मिली थी.

आर्मी से जॉब मिलने के बाद नीरज ने एक इंटरव्यू में कहा था, "मेरे पिता एक किसान हैं और मां हाउसवाइफ हैं और मैं एक ज्वॉइंट फैमिली में रहता हूं. मेरे परिवार में किसी की सरकारी नौकरी नहीं है. इसलिए सब मेरे लिए खुश हैं." उन्होंने आगे कहा था, "अब मैं अपनी ट्रेनिंग जारी रखने के साथ-साथ अपने परिवार की आर्थिक मदद भी कर सकता हूं."

नीरज चोपड़ा ने टोक्यो में मेडल की उम्मीदें बढ़ा दी हैं. (फोटो-PTI)

जब तोड़ा था अपना ही नेशनल रिकॉर्ड

2018 में इंडोनेशिया के जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में नीरज ने 88.06 मीटर का थ्रो कर गोल्ड मेडल जीता था. नीरज पहले भारतीय हैं जिन्होंने एशियन गेम्स में गोल्ड जीता है. एशियन गेम्स के इतिहास में जैवलिन थ्रो में अब तक भारत को सिर्फ दो मेडल ही मिले हैं. नीरज से पहले 1982 में गुरतेज सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था. 

2018 में एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करने के बाद नीरज कंधे की चोट का शिकार हो गए. इस वजह से वो काफी वक्त तक खेल से दूर रहे. 2019 तो उनके लिए और भी खराब रहा और उसके बाद कोरोना के कारण कई इवेंट रद्द हो गए. 

इसके बाद वापसी करते हुए इसी साल मार्च में हुई इंडियन ग्रांड प्रिक्स में नीरज ने 88.07 मीटर का थ्रो कर अपना ही नेशनल रिकॉर्ड तोड़ दिया था. नीरज का ये अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन था. 

कम उम्र से ही दिखा दिया था अपना दम

23 साल के नीरज अंजू बॉबी जॉर्ज के बाद किसी वर्ल्ड लेवल एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में गोल्ड जीतने वाले दूसरे भारतीय हैं. उन्होंने IAAF वर्ल्ड U-20 में गोल्ड जीता था. साल 2016 में उन्होंने साउथ एशियन गेम्स में 82.23 मीटर का थ्रो कर गोल्ड जीता. इसके बाद 2017 में उन्होंने 85.23 मीटर का थ्रो कर एशियन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीता था.

टोक्यो का सफर 

नीरज चोपड़ा ने पिछले साल साउथ अफ्रीका में आयोजित हुए सेंट्रल नॉर्थ ईस्ट मीटिंग एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के जरिए ओलंपिक का टिकट हासिल किया था. उन्होंने 87.86 मीटर जैवलिन थ्रो कर 85 मीटर के अनिवार्य क्वालिफिकेशन मार्क को पार कर यह उपलब्धि हासिल की. उन्होंने अपना बेहतरीन प्रदर्शन हर राउंड में जारी रखा और नतीजा ये रहा कि वे अब गोल्ड मेडल जीत गए हैं.

हालिया प्रदर्शन 

नीरज चोपड़ा ने इस साल मार्च में पटियाला में आयोजित हुए इंडियन ग्रां प्री में रिकॉर्ड 88.07 मीटर तक जैवलिन थ्रो कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. इसके बाद वह जून में लिस्बन में आयोजित हुए मीटिंग सिडडे डी लिस्बोआ टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रहे. इस टूर्नामेंट में पांच पुर्तगाली प्रतिभागियों के बीच उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 83.18 मीटर रहा, जो स्वर्ण पदक जीतने के लिए काफी था. नीरज चोपड़ा ने छठे एवं आखिरी प्रयास में यह दूरी नापी थी. लिएंड्रो रामोस 72.46 मीटर थ्रो के साथ दूसरे, जबकि फ्रांसिस्को फर्नांडीस 57.25 मीटर थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर रहे.

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