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कभी मेलबर्न में टैक्सी चलाते थे जैवलिन थ्रोअर रविंदर सिंह खैरा

मेलबर्न में टैक्सी ड्राइवर रहे रविंदर सिंह खैरा अब भारत के लिए ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में सोना जीतने की उम्मीद बन गए हैं.

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मेलबर्न में टैक्सी ड्राइवर रहे रविंदर सिंह खैरा अब भारत के लिए ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में सोना जीतने की उम्मीद बन गए हैं. पांच साल तक मेलबर्न में टैक्सी चलाने वाले खैरा को ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चुना गया है. वह भाला फेंक स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. पिछले सप्ताह लखनऊ में आयोजित इंटर-स्टेट प्रतियोगिता में सोना जीतकर रविंदर सिंह खैरा ने ग्लास्गो का टिकट कटाया.

वॉलीबाल खिलाड़ी के रूप में शुरुआत करने वाले खैरा ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया. लेकिन जल्द ही उन्होंने भाला फेंक में हाथ आजमाना शुरू कर दिया. 2007 में नेशनल कैंप के लिए चुने गए खैरा के लिए नौकरी पाना भी मुश्किल था. लिहाजा कुछ सालों बाद ही उन्होंने अपने होमटाउन संगरूर को अलविदा कह मेलबर्न की उड़ान पकड़ ली.

ऑस्ट्रेलिया में खैरा के लिए पहला काम ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग का डिप्लोमा पूरा करना था. साथ ही साथ अपने खर्चों के लिए वह वीकेंड पर टैक्सी भी चलाते. फिनलैंड के स्टार जैवलिन खिलाड़ी टेरो पिटकामाकी, खैरा की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाने के लिए प्रेरणास्त्रोत बने. पिटकामाकी के जोर देने पर खैरा ने विक्टोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स में नामांकन कराया और जैवलिन सीखना शुरू कर दिया. 27 वर्षीय खैरा ने कहा, 'मैं हर रोज पूरे दिल से अभ्यास करता औऱ इसका रिजल्ट मुझे जल्दी ही मिलने लगा.'

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 इन सबके बीच कोचिंग और डाइट के खर्चे खैरा के लिए भारी पड़ने लगे. इस समय उनके परिवार और शिक्षकों ने पैसे भेजे. लेकिन ये पैसे इतने नहीं थे खैरा का खर्च पूरा हो सके. उन्हें अब ज्यादा समय टैक्सी चलाने में खर्च करना पड़ता. खैरा वीकेंड पर 26 घंटे काम करते और बाकी वक्त में कोर्स की पढ़ाई करते. इस मुश्किल वक्त में खैरा 12-14 घंटे ट्रेनिंग सेशन में व्यतीत करते.

दो बार विक्टोरिया जैवलिन थ्रो चैम्पियनशिप जीतने वाले खैरा ने कहा, 'मेरे पास ऑस्ट्रेलिया की कोई सुखद यादें नहीं हैं. लेकिन विक्टोरिया इंस्टीट्यूट में बिताए गए समय और अपने कोच इयान सिमंस को मिस करता हूं.' खैरा जितनी तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़े भारत का प्रतिनिधित्व करने की संभावनाएं भी उतनी ही तेजी से बढ़ी.

पिछले साल रांची में नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में सोना जीतने के बाद खैरा को ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के लिए कोर खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया गया. अभ्यास के दौरान खैरा लगातार 80 मीटर के लक्ष्य को भेदते रहे, जो कि ग्लास्गो गेम्स में क्वालिफाई करने के लिए काफी है. हालांकि खैरा को यह पता था कि ग्लास्गो का टिकट कटाने के लिए वह लखनऊ में खेल रहे हैं.

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समय आने पर वह लक्ष्य को भेद सकते हैं लेकिन लखनऊ में पांचवें प्रयास में 78.02 मीटर के थ्रो ने उन्हें ग्लास्गो का टिकट दिला दिया. यह उनका रिकॉर्ड प्रदर्शन था और इसके जरिए उन्होंने ना केवल अपने पिछले रिकॉर्ड 75.47 मीटर को सुधारा बल्कि कॉमनवेल्थ गेम्स के क्वालिफिकेशन मानक 77.29 मीटर को पार कर लिया.

खैरा के लिए यह सपने के सच होने जैसा है. उन्होंने कहा, 'जब मैंने टैक्सी ड्राइवर के रूप में शुरुआत की थी, तो कोई भी मुझे इस खेल में मौका नहीं देना चाहता था. सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स में क्वालिफाई करने को ही ले, तो अपनी उपलब्धियों से बहुत खुश हूं.'

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