भारतीय राष्ट्रीय महिला बास्केटबॉल खिलाड़ी प्रशांति सिंह को देश का सम्मानित खेल पुरस्कार अर्जुन सम्मान के लिए चुना गया है. प्रशांति 2003 में भारतीय महिला बास्केटबॉल टीम में शामिल हुईं और कप्तानी भी की. प्रशांति ने यह खेल क्यों शुरू किया इसके पीछे भी दिलचस्प कहानी है. मुहल्ले के लड़कों से झगड़े के बाद वे बास्केटबॉल कोर्ट जाने लगी थी. आपको बता दें कि प्रशांति की पांच बहनें हैं और सभी बास्केटबॉल खेलती हैं. इन्हें बास्केटबॉल फैमिली ऑफ इंडिया के नाम से जाना जाता है.
कौन हैं प्रशांति? फैमिली क्यों कहलाई बास्केट बॉल फैमिली ऑफ इंडिया
प्रशांति मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जौनुपर के अहमदपुर गांव की रहने वाली हैं. फिलहाल उनकी फैमिली वाराणसी में रहती है. गौरतलब है कि प्रशांति सिंह कुल पांच बहनें हैं. उनका एक भाई भी है. प्रशांति के अलावा प्रियंका, दिव्या, आकांक्षा और प्रतिमा. खास बात ये हैं कि पांच की पांचों बहनें बास्केटबॉल खेलती हैं. वो भी इंडिया लेवल पर. इनमें से 3 बहने अभी भारतीय राष्ट्रीय महिला बास्केटबॉल टीम की सदस्य है और दो बहने खेल चुकी हैं.
कैसे शुरू किया था बास्केटबॉल खेलना?
बनारस में प्रशांति की फैमिली रहती थी. वहां मुहल्ले के लड़कों से खेलने में झगडा हो गया, जिसके कारण मां ने बड़ी बेटी यानी प्रियंका को स्टेडियम भेजना शुरू कर दिया. बड़ी बहन को खेलता देख धीरे- धीरे सारी बहने खेलने लगीं.
खिलाड़ी कम पड़ने पर मिला था पहली बार खेलना का मौका
प्रशांति को पहली बार अंडर 13 में खेलने का मौका तब मिला था टीम में जाने के लिए एक खिलाड़ी कम पड़ रहा था. प्रशांति को कोच ने मौका दिया और उसने मैच में 2 शॉट लगाए. टीम हार गई लेकिन प्रशांति जीत गई थी. पहली बार इनाम में उसे रसगुल्ले मिले थे. यूपी कॉलेज के 'साई' के कोच अमरजीत सिंह ने प्रशांति के साथ साथ सारी बहनों को तराशा कि आज ये हीरा आज पुरे देश में चमक रहा है.
प्रशांति ने की उपलब्धियां
प्रशांति ने एशियाई इंडोर खेलों में कप्तान के रूप में काफी अच्छी भूमिका निभाई थी. श्रीलंका में एशियाई बीच गेम में स्वर्ण पदक जीता. चीन में रजत पदक और 16वें एशियाई खेलों में भी जीत दर्ज कराई. प्रशांति सिंह आईएमजी रिलायंस के बास्केटबाल महासंघ द्वारा चयनित और प्रायोजित भारत की ए ग्रेड के खिलाड़ी में से एक रही. प्रशांति सिंह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय चैम्पियनशिप, राष्ट्रीय खेलों, फेडरेशन कप में 18 पदक जीते है. 2006 के राष्ट्रमंडल खेलों में टीम का प्रतिनिधित्व भी किया.
प्रशांति बोलीं- पांच साल लगातार किया अप्लाई, अब पूरा हुआ सम्मान का सपना
प्रशांति ने आजतक डाट इन से बातचीत में कहा- 25 साल से इस दिन का मेरे परिवार को इंताजार था. मैं पांच बहनों में पहली हूं जिसे ये सम्मान मिलेगा. ये सम्मान मेरे मांता-पिता को समर्पित है. उन्हीं की मेहनत का नतीजा है. पिछले 14 साल से देश के लिए खेल रही हूं और पांच साल से लगातार राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए अप्लाई कर रही हूं, पर पांचवीं बार में देश के सबसे बड़े खेल सम्मान के लिए सिलेक्शन हो पाया.
खुश है परिवार
'बास्केट बॉल फैमिली ऑफ़ इंडिया' के मुखिया यानी प्रशांति के पिता गौरी शंकर सिंह कहते हैं- हमें यकीन था कि एक न एक दिन हमारे बच्चों की मेहनत को देश सम्मान देगा. 25 साल से इस दिन का हमें इंताजार था. प्रशांति कहती हैं कि उन्होंने हमेशा हमारा साथ दिया। पापा कभी-कभी खेल लेकर चिढ़ जाते थे लेकिन मां का साथ हमेशा रहा.
क्रिकेटर ईशांत शर्मा से रिश्तेदारी
प्रशांति सिंह की छोटी बहन प्रतिमा सिंह की शादी भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेदबाज ईशांत शर्मा से हुई है. ईशांत से प्रतिमा की मुलाकात भी बास्केटबॉल कोर्ट में हुई थी. दोनों ने पिछले साल ही शादी की है. शादी गुड़गांव में हुई थी.