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आयोजन स्थल का पानी बुरी तरह से प्रदूषित, आईओसी ने जताई चिंता

अगले साल ब्राजील में होने वाले ओलंपिक आयोजन स्थल पर खतरनाक स्तर तक प्रदूषित पानी पर आईओसी ने गहरी चिंता जताई है. आईओसी अध्यक्ष थॉमस बाक के मुताबिक ब्राजील की सरकार ने ग्वानाबारा बे में बहने वाले 80 फीसदी कचरे को कम करने की प्रतिबद्धता जताई थी इसके बावजूद वहां भारी मात्रा में गंदगी मौजूद है.

2016 रियो ओलंपिक खेलों के दौरान ग्वानाबारा बे में होनी है नौकायन प्रतियोगिता 2016 रियो ओलंपिक खेलों के दौरान ग्वानाबारा बे में होनी है नौकायन प्रतियोगिता

अगले साल ब्राजील में होने वाले ओलंपिक आयोजन स्थल पर खतरनाक स्तर तक प्रदूषित पानी पर आईओसी ने गहरी चिंता जताई है. आईओसी अध्यक्ष थॉमस बाक के मुताबिक ब्राजील की सरकार ने ग्वानाबारा बे में बहने वाले 80 फीसदी कचरे को कम करने की प्रतिबद्धता जताई थी इसके बावजूद वहां भारी मात्रा में गंदगी मौजूद है.

पानी खतरनाक तरीके से दूषित
गौरतलब है कि प्रशिक्षण के लिए यहां पहुंची ऑस्ट्रेलियाई नौकायान टीम को इसी वजह से ट्रेनिंग भी रोकनी पड़ी. यहां प्रदूषण का स्तर इतना अधिक है कि केवल तीन चम्मच पानी पीने से ही कोई स्वस्थ खिलाड़ी बीमार पड़ सकता है. इस पानी से टायफायड और हेपेटाइटिस-ए होने का खतरा है. 2013 से ही इस मामले पर लगातार सवाल-जवाब हो रहे हैं और ब्राजील सरकार लगातार कह रही है कि वो इस दिशा काम कर रही है और इस मामले को सुलझा लिया जाएगा.

क्या है पूरा मामला?
2013 में जब ये मामला सामने आया था तो आयोजकों का कहना था कि उन्हें प्रदूषण की चिंता है और वो तय समय में इस पर काबू पा लेंगे. ग्वानाबारा बे (खाड़ी) में गिरने वाला 48 फीसदी सीवेज बिना किसी ट्रीटमेंट के यहां आकर गिरता है. जबकि अवैध तरीके से आ रहा कचरा भी बड़ी समस्या है. 2014 में आयोजकों ने इस कचरे को साफ करने की प्रतिबद्धता जताते हुए स्वीकारा था कि इस दिशा में वो अपने तय लक्ष्य से बहुत पीछे चल रहे हैं लेकिन वो इस काम को ओलंपिक शुरू होने से पहले तक निबटा लेंगे. इन सब बातों से तंग आकर 2014 में आईओसी के वाइस प्रेसीडेंट जॉन कोट्स ने कहा था, 'मैंने आजतक रियो से ज्यादा खराब तैयारियों वाला आयोजन स्थल नहीं देखा है.'

आपको बता दें कि ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी करते वक्त ब्राजील ने ग्वानाबारा बे के प्रदूषण को 80 फीसदी तक घटाने का दावा किया था. फरवरी 2015 में ओलंपिक आयोजन समिति की कम्यूनिकेशन डिपार्टमेंट ने एक बयान में कहा था, 'आयोजन स्थल की गंदगी एक अहम मुद्दा है लेकिन सच ये भी है कि ये ओलंपिक के लिए सुरक्षित है.'

खिलाड़ियों की सुरक्षा अहम मुद्दा
नौकायन के प्रतिभागियों के साथ ही अधिकारियों ने भी बे के प्रदूषण के लिए पहले ही अपना विरोध दर्ज कराया था. नौकायन में पांच ओलंपिक मेडल जीत चुके ब्राजील की टीम के मौजूदा हेड कोच टोरबेन ग्राइल कहते हैं, 'अगर पानी में प्लास्टिक और अन्य चीजें तैरती रहेंगी, जो कि नौकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं तो आपको एक ऐसी रेस में भाग लेना पड़ेगा जिसका परिणाम खेल नहीं बल्कि प्रदूषण तय करेगा. और यह बड़ी समस्या है.'

इस पानी में तैरती चीजों के अलावा तमाम वायरसों से संबंधित समस्याएं भी हैं, यहां के पानी में ऐसे वायरस भी पाए गए हैं जिनके संपर्क में आने पर खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं. ग्वानाबारा बे के मौजूदा हालात पर अधिकारियों का कहना है कि बे पूरी तरह से साफ तो नहीं हो पाई है लेकिन वो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है. जबकि बीते रविवार को हुए नौकायन प्रतियोगिता के पहले ऑफिशियल टेस्ट इवेंट के बाद प्रतियोगियों ने पानी में तैरते मलबे, इसमें सोफे, दरवाजे और मरे हुए जानवर तक शामिल हैं, की शिकायत की.

क्या कर रही है वहां की सरकार?
इस मामले पर इंटरनेशनल सेलिंग फेडरेशन के अध्यक्ष एलिस्टेयर फॉक्स का कहना है, 'नाविक और नौकाएं किसी भी ऐसी जगह पर नहीं खेलना चाहते जहां पर किसी भी प्रकार का अवरोध हो, और वहां पर तो सोफे, दरवाजे, कुत्ते जैसे अवरोध हैं जिनसे किसी भी नाविक का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है. हमें ध्यान देना होगा कि रेस कोर्स (ग्वानाबारा बे) सबके लिए साफ और ईमानदार होने के साथ ही मलबे से मुक्त भी रहे.' वहीं इस मामले पर ब्राजीली मीडिया में अटकलें हैं कि इस प्रतियोगिता को कहीं और शिफ्ट किया जा सकता है. जबकि ओलंपिक की आयोजन समिति के हिसाब से उनके पास कोई बी प्लान नहीं है. रियो 2016 की स्थिरता मैनेजर जूली डफ्स का कहना है, 'हालिया टेस्ट सकारात्मक रहे और अब हम कह सकते हैं कि खिलाड़ियों के लिए पानी सुरक्षित है.'

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