भारत और पाकिस्तान के कई बड़े क्रिकेटर कभी भी मैदान में तेज गेंद या फिर
लंबे छक्के से नहीं डरे. लेकिन मैदान के बाहर जब उनका अंग्रेजी से सामना
हुआ था तो फिर वो बगले झांकने लगे. ये आज की बात नहीं है, जब से भारत-पाक
में क्रिकेट ने जन्म लिया है, तभी से कई क्रिकेटरों को अंग्रेजी भाषा रुला
रही है, और आज भी इंग्लिश कई क्रिकेटरों के पीछे पड़ी है.
दरअसल एक बार फिर सोमवार को दुबई में 'सलाम क्रिकेट 2018' का मंच सजा, इस बार मंच पर एशिया के 11 दिग्गज क्रिकेटर्स जुटे थे. कार्यक्रम के आखिरी राउंड में दिग्गज क्रिकेटरों ने कई यादें ताजा कीं. एक-एक कर सबने बताया कि क्रिकेट जगत में उनके लिए सबसे खास लम्हा क्या था.
बातचीत आगे बढ़ी तो इंग्लिश के सताए क्रिकेटरों का दर्द छलक उठा. एक-एककर सब अपनी कहानी सुनाने लगे. वसीम अकरम ने बताया शुरुआती दिनों में मैच के बाद अंग्रेजी से सामना सबसे मुश्किल दौर था. सामने माइक देखते ही गला सूख जाता था कि क्या जवाब दूंगा.
अकरम ने बताया कि 1985 में उनका पहली बार अंग्रेजी से मैच के बाद सामना हुआ. किसी तरह टूटी-फूटी भाषा में बोलकर ड्रेसिंग रूम में पहुंचे, तो वहां जिसको अंग्रेजी नहीं आती थी वो भी मेरा मजाक उड़ा रहे थे. कह रहे थे कि तुम गलत बोलकर आए हो. फिर हमने ने कहा कि जरा तुम ही सही बोलकर दिखाओ. उस समय पाकिस्तान टीम के साथ ये समस्या थी कि जिसे अंग्रेजी नहीं आती थी वो हमारा मजाक उड़ाते थे. मजाक में लोग बचा हुआ मनोबल भी गिरा देते थे.
उसके बाद अजहर ने अंग्रेजी से जुड़ी एक कहानी सुनाई. उन्होंने 90 के दशक की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीकांत को मजाक करने का बेहद शौक था, लेकिन जब कोई उसके साथ मजाक करता था तो वो सहन नहीं कर पाते थे. एक बार मैदान पर खेल के दौरान किसी वजह से श्रीकांत नरेंद्र हिरवानी से नाराज हो गए और उनको अंग्रेजी में लगातार कुछ न कुछ कहते रहे. हिरवानी को अंग्रेजी नहीं आती थी और वह चुपचाप सुनता रहा. श्रीकांत ने जब अपनी बात खत्म की तो हिरवानी ने श्रीकांत से कहा- श्रीकांत भाई, आपने अभी तक अंग्रेजी में जो कुछ कहा, मुझे समझ में नहीं आया, इसलिए आपने जो भी बोला- सेम टू यू.
सबसे मजेदार कहानी वसीम अकरम ने सुनाई. उन्होंने बताया कि एक मैच में अब्दुल रज्जाक 'मैन ऑफ द मैच' चुने गए, और मैच सेरेमनी को रमीज राजा संबोधित कर रहे थे. उन्होंने रज्जाक से कहा कि आखिरी के ये 3 सवाल अंग्रेजी में पूछे जाएंगे. रज्जाक ने तीनों सवालों के जवाब रट लिए, पहला सवाल का ये जवाब, दूसरे का ये और फिर तीसरे का ये. लेकिन बाई डिफ्लोट रमीज राजा ने दूसरे नंबर का सवाल पहले पूछ दिया और रज्जाक फंस गए. मुंह के सामने माइक आते ही रज्जाक बोल पड़े, पहले वाला सवाल जरा दोबारा से पूछना. यानी सवाल बदलते ही अब्दुल रज्जाक के होथ उड़ गए कि अब क्या बोलूं.
आखिरी में हरभजन सिंह का भी अंग्रेजी को लेकर दर्द छलका. उन्होंने बचपन की यादें ताजा करते हुए कहा कि एक बार कोई बड़े अधिकारी आ रहे थे, हमसे कहा गया कि कि लाइन से खड़े हो जाओ, उन्हें अपना नाम बताना है और बताना है आप कहां से हो? मैं छोटा था, मैंने देखा लाइन में खड़े लोग कह रहे थे Hi, i am varun verma, where are you from... himachal. Hi i am sayyad, from patna. फिर उसने मेरी तरफ देखा, उसे लगा कि ये सरदार आदमी है पंजाब से ही होगा. उसने सवाल पूछने का तरीका बदल दिया और कहा- Where are you from.. मैंने कहा- हरभजन सिंह, what's your name? मैंने जवाब दिया- जालंधर.
भज्जी ने कहा कि अंग्रेजी से बचने के लिए उन्होंने क्या-क्या नहीं किया. मुंह में खाना डाल लेते थे कि अंग्रेजी में नहीं बोलना पड़े. और बहाना बनाते थे कि अभी खाना खाने दो फिर जवाब देता हूं.
एक और दिलचस्प कहानी हरभजन सिंह ने शेयर की. भज्जी ने कहा- मोहाली में मैच चल रहा था. लंच ब्रेक हुआ था. मेरा पहली बार टेस्ट टीम में सेलेक्शन हुआ था. उस समय मैं महज 17 साल का था. तभी कुछ इंग्लिश अखबारों के पत्रकारों को अपनी ओर आते हुए देखा, उन्हें देखते ही मेरा गला सूखने लगा, दिल धक-धक करने लगा. उनमें से एक ने पूछा- भज्जी Have you done your graduation? मैंने कह दिया- हां...हां रिजर्वेशन हो गया है, और परसों जा रहा हूं.