आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 चरण में साउथ अफ्रीका से मिली करारी हार ने भारत की सेमीफाइनल की राह बेहद मुश्किल बना दी है. सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली टीम इंडिया अब ऐसी स्थिति में पहुंच गई है, जहां उसे अंतिम चार में जगह पक्की करने के लिए अपने दोनों बचे मुकाबले हर हाल में जीतने होंगे.
भारतीय टीम अब 26 फरवरी (गुरुवार) को चेन्नई के एमए. चिदंबरम स्टेडियम में जिम्बाब्वे का सामना करेगी. फिर 1 मार्च (रविवार) को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में उसका सामना वेस्टइंडीज से होगा. वैसे ये दोनों मैच जीतने पर भी भारतीय टीम सेमीफाइनल से पहले ही बाहर हो सकती है.
ऐसे फंस सकता है मामला
♦ मान लीजिए कि वेस्टइंडीज ने जिम्बाब्वे के अलावा साउथ अफ्रीका को हराया. दूसरी तरफ साउथ अफ्रीकी टीम ने जिम्बाब्वे को पराजित किया. तो ऐसी स्थिति में तीन टीमों के दो-दो अंक होंगे और मामला नेट रनरेट पर आएगा.
♦ भारत के लिए सबसे अच्छी स्थिति ये होगी कि साउथ अफ्रीका अब जिम्बाब्वे के अलावा वेस्टइंडीज को मात दे. यदि ऐसा होता है तो भारतीय टीम अपने दोनों मैच जीतकर चार अंकों के साथ सेमीफाइनल में पहुंच जाएगी. तब उसे नेट रनरेट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
♦ अगर भारतीय टीम सिर्फ एक मैच जीतती है, तो सेमीफाइनल की उम्मीदें दूसरे नतीजों और नेट रनरेट पर पूरी निर्भर हो जाएगी. फिलहाल भारत का नेट रनरेट -3.80 है, जो बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है.
2012 के वर्ल्ड कप जैसा ना हो जाए!
भारतीय टीम की जो मौजूदा स्थिति है, वो फैन्स को आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2012 की याद दिला रही है. उस टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने लीग स्टेज में इंग्लैंड और अफगानिस्तान पर जीत हासिल की थी. फिर सुपर-8 में भारतीय टीम अपना पहला मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के हाथों 9 विकेट से हार गई. उस हार के चलते भारत का नेट-रनरेट काफी खराब हो गया था.

भारतीय टीम ने उसके बाद पाकिस्तान पर 8 विकेट से जीत हासिल की. जबकि साउथ अफ्रीका को 1 रन से पराजित किया. इन दो जीतों के बावजूद भारतीय टीम खराब नेट रनरेट के चलते ग्रुप-2 की अंकतालिका में ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान से नीचे रही और उसे टूर्नामेंट से नॉकआउट होना पड़ा था. तब ग्रुप-ए से वेस्टइंडीज और श्रीलंका, जबकि ग्रुप-2 से ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान सेमीफाइनल में पहुंचने वाली टीम्स रहीं. फाइनल में वेस्टइंडीज ने श्रीलंका को 36 रनों से हराकर पहली बार टी20 वर्ल्ड कप पर कब्जा जमाया था.
इस बार भी कहानी कहीं वैसी ही मोड़ ना ले ले, यही डर सता रहा है. घरेलू सरजमीं पर खिताब जीतने के इरादे से उतरी टीम इंडिया अचानक असमंजस की स्थिति में है. प्रोटियाज के खिलाफ मिली हार ने टूर्नामेंट का रुख बदल दिया है और अब हर मुकाबला भारत के लिए 'करो या मरो' जैसा बन चुका है.