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चार रन से रुका इतिहास... वानखेड़े में नेपाल ने टी20 वर्ल्ड कप का मतलब बता दिया

इतिहास बस एक शॉट दूर था, लेकिन उससे भी बड़ी बात यह रही कि नेपाल ने खुद को ‘अंडरडॉग’ नहीं, बल्कि एक गंभीर चुनौती के रूप में स्थापित किया. यह मैच जीत-हार से आगे जाकर छोटी टीमों को मिलने वाले अवसरों पर सवाल उठाता है और याद दिलाता है कि अगर इन्हें लगातार बड़े मंच मिलें, तो टी20 वर्ल्ड कप में बड़े उलटफेर अब सिर्फ कल्पना नहीं रहेंगे...

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नेपाल का हैरतअंगेज खेल... (Photo, Getty)
नेपाल का हैरतअंगेज खेल... (Photo, Getty)

वानखेड़े की उस शाम में सब कुछ था- फ्लडलाइट्स की तेज रोशनी, टी20 वर्ल्ड कप का दबाव, इंग्लैंड जैसा बड़ा नाम और करोड़ों निगाहें... लेकिन जो सबसे अलग था, वह था माहौल. माहौल इतना अपनापन और जोश से भरा था कि वह विश्व कप का नहीं, बल्कि किसी टीम के अपने घर में खेले जा रहे मैच जैसा लग रहा था. स्टेडियम मुंबई में था, मगर दिल और आवाजें काठमांडू से आ रही थीं. लाल और नीले झंडों से भरे स्टैंड, ढोल-नगाड़े, हर गेंद पर उठती सामूहिक सांस- वानखेड़े उस रात सिर्फ एक मैदान नहीं, नेपाल का विस्तार बन गया था.

टी20 वर्ल्ड कप क्रिकेट का वह मंच है जहां नाम, रैंकिंग और इतिहास अक्सर पहली गेंद के साथ ही उतर जाते हैं. यहां हर ओवर इम्तिहान होता है और हर गलती सजा. इंग्लैंड इस टूर्नामेंट में खिताबी दावेदार के तौर पर उतरा है, जबकि नेपाल को 'अंडरडॉग' के खांचे में रख दिया गया... लेकिन जैसे-जैसे यह मैच आगे बढ़ा, यह टैग बेमानी होता गया. नेपाल ने डरकर नहीं, बल्कि पूरी निडरता और भरोसे के साथ क्रिकेट खेला- जैसे कह रहा हो कि इस विश्व कप में हम सिर्फ संख्या बढ़ाने नहीं आए हैं.

नेपाल की बल्लेबाजी में जोखिम था, लेकिन वह बेवजह का नहीं था. गेंदबाजी में आक्रामकता थी, लेकिन अनुशासन के साथ. फील्डिंग में ऊर्जा थी, जैसे हर खिलाड़ी अपने देश के लिए अतिरिक्त दस मीटर दौड़ने को तैयार हो. इंग्लैंड को हर रन के लिए मेहनत करनी पड़ी और यही टी20 वर्ल्ड कप की सबसे बड़ी सच्चाई है- यहां कोई भी मैच पहले से जीता हुआ नहीं होता.

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फिर आया वह पल, जिसके लिए टी20 क्रिकेट जाना जाता है- आखिरी ओवर. स्कोरबोर्ड ने कहा- 10 रन चाहिए. नेपाल के फैन्स ने कहा- अभी सब बाकी है. पहली गेंद पर उम्मीद जागी, दूसरी पर दिल की धड़कन तेज हुई, तीसरी पर पूरा स्टेडियम खड़ा हो गया. हर शॉट के साथ ऐसा लग रहा था मानो इतिहास करवट बदलने वाला है. लेकिन अंत में सिर्फ 5 रन बने. चार रन का अंतर और इंग्लैंड किसी बड़े उलटफेर से बाल-बाल बच गया.

स्कोरकार्ड इसे इंग्लैंड की जीत कहेगा. रिकॉर्ड बुक में यह एक साधारण सा परिणाम बनकर दर्ज हो जाएगा... लेकिन टी20 वर्ल्ड कप की असली याददाश्त कहीं और होती है- उन लम्हों में, जब एक छोटी टीम बड़े नाम को हिला देती है. सच यह है कि यह मैच नेपाल ने नहीं हारा, बल्कि इंग्लैंड ने किसी तरह बचाया.

अगर लोकेश बाम का एक शॉट ठीक से बैठ जाता,अगर कप्तान रोहित पौडेल उस दबाव में एक और बड़ा दांव खेल लेते...या दीपेंद्र सिंह ऐरी की एक हिट बाउंड्री के पार चली जाती... तो इस विश्व कप की शुरुआत ही एक ऐतिहासिक कहानी से हो जाती. लेकिन टी20 वर्ल्ड कप ‘अगर’ पर नहीं चलता. यह यादों पर चलता है और नेपाल ने खुद को एक ऐसी याद बना दिया, जिसे भुलाना आसान नहीं होगा.

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8 फरवरी 2026 की शाम काठमांडू के खुले मैदान में सिर्फ एक लाइव स्क्रीन नहीं लगी थी, वहां नेपाल का सपना धड़क रहा था. ठंडे मौसम के बावजूद हजारों नेपाली क्रिकेट फैन्स मैदान में जमा थे- कोई झंडा लहराते हुए, कोई ढोल बजाते हुए, तो कोई हर गेंद पर सांस रोके खड़ा. इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला स्क्रीन पर चल रहा था, लेकिन भावनाएं मैदान से कहीं आगे थीं. हर चौका उम्मीद बनता, हर विकेट सन्नाटा खींच लाता और आखिरी ओवर तक पूरा मैदान एक साथ धड़कता रहा.

इस मैच ने एक बड़ा सवाल भी छोड़ा. नीदरलैंड्स, अमेरिका और अब नेपाल- इन टीमों ने टूर्नामेंट की शुरुआत को रोमांचक बना दिया, लेकिन हर बार एक ही वजह सामने आई... अनुभव की कमी. सवाल यह है कि जब इन टीमों को नियमित रूप से बड़ी टीमों के खिलाफ खेलने के मौके ही नहीं मिलेंगे, तो वे आखिरी लकीर पार करना कैसे सीखेंगी? आप उन्हें मंच कम देंगे और फिर उनसे पूर्णता की उम्मीद करेंगे- यह न्याय नहीं है.

नेपाल के खिलाड़ी उन्हीं भारतीय सुपरस्टार्स को देखकर बड़े हुए हैं, जिनके नाम आज विश्व क्रिकेट में गूंजते हैं. टीवी स्क्रीन से शुरू हुआ सपना अब विश्व कप के मंच तक पहुंच चुका है. इस टीम को और मौके मिलें, त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय सीरीज में लगातार खेलने का अवसर मिले, तो यह चार रन का फासला जल्द ही खत्म हो सकता है.

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उस शाम नेपाल जीत नहीं सका...लेकिन उसने टी20 वर्ल्ड कप को वह दे दिया, जिसकी इस टूर्नामेंट को सबसे ज्यादा जरूरत होती है- ईमानदार क्रिकेट, निडर टक्कर और भविष्य की साफ झलक. वानखेड़े से लौटते वक्त लोगों की आंखों में एक ही तस्वीर अटकी हुई थी- नेपाल की टीम, सिर ऊंचा किए मैदान छोड़ती हुई. चार रन पीछे, लेकिन क्रिकेट की दुनिया में एक कदम आगे.

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