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Salaam Cricket 2019: वसीम अकरम ने माना- PAK गेंदबाजों की स्लेजिंग सचिन के सामने बेअसर

Salaam Cricket 2019:  सचिन तेंदुलकर और वसीम अकरम सलाम क्रिकेट 2019 के सचिन vs वसीम– द ग्लेडियेटर्स सेशन में शामिल हुए.

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Salaam Cricket 2019 AajTak Sachin Tendulkar vs Wasim Akram
Salaam Cricket 2019 AajTak Sachin Tendulkar vs Wasim Akram

Salaam Cricket 2019: पाकिस्तान के दिग्गज तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने कहा 90 के दशक में खूब स्लेजिंग होती थी. उन्होंने कहा कि उस बल्लेबाज को उकसाया जाता था, जिसे गुस्सा आता हो, लेकिन सचिन तो शांत रहते थे. वह स्लेजिंग से मोटिवेट होते थे. इसलिए हमने सचिन के साथ स्लेजिंग बंद कर दी थी. अकरम ने कहा कि शोएब और वकार भी खूब स्लेजिंग करते थे. वैसे भी मैच में स्लेजिंग चलती ही रहती है.

वसीम अकरम ने रविवार को लॉर्ड्स (लंदन) में आयोजित 'सलाम क्रिकेट 2019 ' के 'सचिन vs वसीम– द ग्लेडियेटर्स' सेशन के दौरान कहा कि पावर प्ले में जब कोई परफेक्ट बल्लेबाज आता था तो मुझे लगता था कि इसे आउट तो होना नहीं है और शॉट भी प्रॉपर खेलेगा. इसलिए भी हम स्लेजिंग शुरू कर देते थे.

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पाकिस्तान से था मैच, 10 दिन नहीं सो पाए थे सचिन

इसी सत्र में सचिन ने कहा, '2003 में पाकिस्तान के खिलाफ मैच से पहले मुझे 10 दिनों तक नींद नहीं आई थी. क्योंकि पाकिस्तान की गेंदबाजी बहुत जबरदस्त थी. ' भारत से मैच हारने पर वसीम ने कहा कि हां ये मेरे साथ भी हुआ. भारत और पाकिस्तान के मैच के बीच बहुत दबाव होता है, क्योंकि मैच से एक दिन पहले मां कहती है मैच नहीं हारना, बहन कहती है मैच नहीं हारना, रिक्शे वाला कहता है मैच नहीं हारना. ऐसे में दबाव बनता जाता है, लेकिन जो प्लेयर दबाव झेल जाते हैं, वही जीतते हैं.  सचिन ने बताया कि 2013 में पाकिस्तान के खिलाफ वीरेंद्र सहवाग वसीम अकरम को नहीं खेलना चाहते थे. मैंने भी पहली बॉल खेलने के लिए मना कर दिया था. ये बस मस्ती के लिए था. उस मैच में मैंने ही पहली बॉल फेस की थी.

वसीम ने 4 बाउंसर डाली, तब पता चला शुरुआत ऐसी होती है

सचिन तेंदुलकर ने कहा कि लॉर्ड्स से बहुत पुरानी यादें जुड़ी हैं. उन्होंने बताया कि जब वह 10 साल के थे तो 1983 में भारत ने लॉर्ड्स में इतिहास रचा था. उसी दिन से उनके क्रिकेट का सफर शुरू हुआ था. उन्होंने कहा कि मैं जब इंडियन टीम में आया तो सबसे पहले पंजाबी सीखी. सचिन ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में शुरू में वसीम ने मुझे (जब मैं 16 साल का था) चार गेंद बाउंसर मारी, तब मुझे पता चला कि शुरुआत ऐसे ही होती है. मुझे लगा था कि यहीं सब खत्म हो गया. जब मैं आउट होकर वापस जा रहा था तब मैं बहुत मायूस था. मैं वॉशरूम गया और खुद को आइने में देखा और सोचा कि यहीं पर सब कुछ खत्म हो रहा है. साथ ही मैं यह भी सोच रहा था कि काश मुझे एक मौका और मिल जाए.

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