द हंड्रेड (The Hundred) 2026 के ऑक्शन से पहले पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार द हंड्रेड की नीलामी में पाकिस्तानी क्रिकेटरों के अनसोल्ड रहने की संभावना जताई जा रही है, खासकर उन फ्रेंचाइजीज में, जिनका संबंध इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) मालिकों से है.
हाल ही में फ्रेंचाइजीज की हिस्सेदारी बिक्री के बाद चार टीमें मैनचेस्टर सुपर जायंट्स, एमआई लंदन, सदर्न ब्रेव और सनराइजर्स लीड्स कम से कम आंशिक रूप से आईपीएल से जुड़े मालिकों के नियंत्रण में आ गई हैं. बताया जा रहा है कि ये चारों फ्रेंचाइजी टीमें पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बोली नहीं लगाने वाली हैं.
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द हंड्रेड में खिलाड़ियों की नीलामी 11 मार्च (महिला) और 12 मार्च (पुरुष) को लंदन में आयोजित की जाएगी. लगभग 18 देशों के करीब 1000 खिलाड़ियों को ऑक्शन पूल में शामिल किया गया है, जिनमें पाकिस्तान के कई नामी खिलाड़ी भी हैं. हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आईपीएल-लिंक्ड फ्रेंचाइजीज की रणनीति के चलते पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए राह आसान नहीं दिख रही.
IPL फ्रेंचाइजीज का निवेश विदेशी लीग्स तक
इस स्थिति की पृष्ठभूमि भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण राजनीतिक संबंधों से जुड़ी मानी जा रही है, 2008 के बाद से किसी भी पाकिस्तानी खिलाड़ी को आईपीएल में मौका नहीं मिला है. आईपीएल मालिकों का निवेश अब बड़ी-बड़ी टी20 लीगों तक फैल चुका है और वहां भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों की अनदेखी देखने को मिली है. ILT20 (इंटरनेशनल लीग टी20) में केवल अमेरिकी स्वामित्व वाली टीम डेजर्ट वाइपर्स ने पाकिस्तानी क्रिकेटरों को मौका दिया है.
इस बीच इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट (ECB) के एक वरिष्ठ अधिकारी की ओर से कथित तौर पर एक प्लेयर एजेंट को अनौपचारिक रूप से यह संकेत दिया गया है कि आईपीएल-लिंक्ड फ्रेंचाइजीज पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बोली नहीं लगाएंगी. हालांकि ईसीबी के मुख्य कार्यकारी रिचर्ड गोल्ड ने पहले कहा था कि इंग्लैंड क्रिकेट में किसी भी देश के खिलाड़ियों के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया था कि भेदभाव विरोधी नीति का सख्ती से पालन किया जाएगा और उल्लंघन की स्थिति में नियामक कार्रवाई होगी.
पिछले सीजन में मोहम्मद आमिर और इमाद वसीम जैसे पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने मेन्स हंड्रेड में हिस्सा लिया था. इससे पहले शाहीन शाह आफरीदी, शादाब खान और हारिस रऊफ भी इस लीग का हिस्सा रह चुके हैं. हालांकि महिला वर्ग में अब तक किसी भी पाकिस्तानी खिलाड़ी को जगह नहीं मिली है. अब सबकी नजरें 11 और 12 मार्च को होने वाली नीलामी पर टिकी है. यदि पाकिस्तानी खिलाड़ी वाकई अनसोल्ड रहते हैं, तो यह मामला क्रिकेट और राजनीति के टकराव की एक और बड़ी मिसाल बन सकता है.