टीम इंडिया ने एक बार फिर वर्ल्ड कप के मुकाबले में पाकिस्तान को आसानी से पटखनी दे दी. इस जीत के साथ ही भारत ने पाकिस्तान को ये भी बता दिया कि मैदान पर जवाब प्रदर्शन से दिया जाता है. कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में टीम इंडिया ने हर विभाग में पाकिस्तान को पीछे छोड़ दिया. लेकिन ये हार केवल पाकिस्तान के लिए एक मैच की हार तक सीमित नहीं है. बल्कि इस जीत से भारत ने पाकिस्तान की तमाम रणनीतियों, ड्रामेबाजी और प्लान की धज्जियां उड़ा दी.
दरअसल, इस मैच से पहले माहौल कुछ और था. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ और गृहमंत्री मोहसिन नकवी की ओर से इस मैच का बायकॉट किया गया. पाकिस्तानी सरकार ने इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और बांग्लादेश को मोहरा बनाया. बीसीसीआई को बदनाम करने की नापाक साजिश रची.
करीब दो हफ्ते तक पाकिस्तान ने ड्रामेबाजी की. लगातार बयानबाजी की. हालांकि, बाद में पाकिस्तान ने पलटी मारी और मैच खेलने के लिए राजी हो गया.
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इसके साथ ही पाकिस्तान ने उस्मान तारिक की मिस्ट्री स्पिन को लेकर भी बड़ा हाइप बनाया. कप्तान सलमान आगा ने उन्हें टीम का ‘ट्रंप कार्ड’ बताया था. लेकिन मैदान पर कहानी अलग निकली.
नकवी ने अपनी ड्रामेबाजी के जरिए इस मैच को सियासी संग्राम बनाया. कई देशों को साधने की कोशिश की. लेकिन नकवी की एक न चली और आखिरकार मेदान पर जब पाकिस्तान भारत के सामने आया तो हर बार की तरह एक बार फिर उसे धूल चाटनी पड़ी.
सूर्या की कप्तानी, भारत की समझदारी
भारतीय कप्तान सूर्यकुमार ने मैच को शांत दिमाग से संभाला. शुरुआती झटके के बाद भारतीय बल्लेबाजों ने जल्दबाजी नहीं की. जोखिम भरे शॉट्स से बचते हुए टीम ने मजबूत स्कोर खड़ा किया.
जिस उस्मान तारिक को लेकर इतनी चर्चा थी, वह असर छोड़ने में नाकाम रहे. भारतीय बल्लेबाजों ने उन्हें संभलकर खेला और कोई बड़ा मौका नहीं दिया. उनकी मिस्ट्री गेंदबाजी भारत के खिलाफ बेअसर साबित हुई.
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गेंदबाजी में भी भारत भारी
जब पाकिस्तान लक्ष्य का पीछा करने उतरा तो भारतीय गेंदबाजों ने दबाव बनाए रखा. पावरप्ले में विकेट गिरे और पाकिस्तान संभल नहीं सका. बड़े शॉट खेलने की कोशिश में बल्लेबाज लगातार आउट होते गए.
भारत ने दिखाया कि बड़े मैच सिर्फ बयानबाजी से नहीं, बल्कि संयम और रणनीति से जीते जाते हैं. पाकिस्तान की तरफ से बनाए गए माइंडगेम मैदान पर टिक नहीं सके.
बयान बनाम प्रदर्शन
मैच से पहले जो शोर था, वह मैदान पर शांत हो गया. न तो बायकॉट की चर्चा काम आई और न ही मिस्ट्री स्पिन का दांव. भारत ने एक बार फिर साबित किया कि दबाव में खेलने का अनुभव और मैच की समझ ही असली ताकत है. इस जीत के साथ टीम इंडिया ने टूर्नामेंट में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली, जबकि पाकिस्तान के लिए यह हार कई सवाल छोड़ गई.
भारत-पाकिस्तान मुकाबला हमेशा खास होता है, लेकिन इस बार संदेश साफ था-ड्रामा नहीं, प्रदर्शन मायने रखता है.