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कोई मजदूर, कोई प‍िज्जामैन तो कोई अकाउंटेंट... ‘डबल लाइफ’ जीते हैं इटली के क्रिकेटर

नेपाल के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप में इटली की 10 विकेट की ऐतिहासिक जीत सिर्फ एक उलटफेर नहीं, बल्कि संघर्ष और जुनून की कहानी है. इस टीम के 15 में से 12 खिलाड़ी नौकरीपेशा हैं... कोई अकाउंटेंट, कोई मजदूर, कोई हॉस्पिटैलिटी स्टाफ- जो दिन में काम और शाम को देश के लिए क्रिकेट खेलते हैं. यह जीत बताती है कि संसाधनों की कमी के बावजूद सपनों की उड़ान रोकी नहीं जा सकती.

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Pizza-maker Kalugamage. दिन में पिज्जा, शाम को जादुई स्पिन (Photo, PTI)
Pizza-maker Kalugamage. दिन में पिज्जा, शाम को जादुई स्पिन (Photo, PTI)

इटली की नेपाल के खिलाफ जीत को सिर्फ 10 विकेट की आसान सफलता कह देना नाइंसाफी होगी. यह उस टीम की कहानी है, जिसके खिलाड़ी सुबह नौकरी पर हाजिरी लगाते हैं और शाम को देश की जर्सी पहनकर सपनों की लड़ाई लड़ते हैं.

टी20 वर्ल्ड कप में नेपाल के खिलाफ 124 रनों का लक्ष्य बिना कोई विकेट गंवाए हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है... लेकिन जब यह कारनामा विश्व रैंकिंग में 27वें स्थान पर काबिज ऐसी टीम करे, जिसके अधिकांश खिलाड़ी पेशेवर नहीं बल्कि ‘पार्ट-टाइम’ क्रिकेटर हों, तो यह जीत स्कोरकार्ड से कहीं आगे बढ़कर इतिहास बन जाती है.

इस कहानी के नायक बने क्रिशन कलुगमगे (Crishan Kalugamage)- पेशे से पिज्जा बनाने वाले और मैदान पर जादुई लेग स्पिनर. लुका (टस्कनी) की पत्थर जड़ी गलियों में पिज्जा का आटा उछालने वाले यही हाथ वानखेड़े की पिच पर गेंद को ऐसी स्पिन दे रहे थे कि नेपाल के बल्लेबाज उलझ कर रह गए. कलुगमगे ने 3 विकेट लेकर नेपाल को 123 रन पर रोकने में निर्णायक भूमिका निभाई.

नेपाल वही टीम थी जिसने कुछ दिन पहले इंग्लैंड को कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन इटली के खिलाफ उनकी मध्यक्रम की कमर टूट गई. इसके बाद जस्टिन मोस्का और एंथनी मोस्का  (मोस्का ब्रदर्स) ने बेखौफ बल्लेबाजी करते हुए बिना विकेट गंवाए लक्ष्य हासिल कर लिया. यह सिर्फ जीत नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास में इटली की पहली टी20 विश्व कप विजय थी.

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कलुगमगे की कहानी श्रीलंका के नेगोम्बो से शुरू होती है, जहां क्रिकेट सांसों में बसता है. 2007 में परिवार के साथ इटली जाने के बाद उन्हें लगा था कि क्रिकेट का सपना खत्म हो गया. होटल की नौकरी, आटे के बोरे और लंबी शिफ्टों के बीच उन्होंने पार्किंग लॉट और सार्वजनिक मैदानों में टेनिस बॉल क्रिकेट खेलकर अपने जुनून को जिंदा रखा.

रोमा क्रिकेट क्लब से जुड़ने के बाद भी उनकी राह फूलों भरी नहीं थी. रविवार- जो रेस्तरां कारोबार का सबसे व्यस्त दिन होता है... उसी दिन मैच भी होते थे. क्रिकेट चुनने की कीमत उन्होंने कई नौकरियां खोकर चुकाई.

तेज गेंदबाज के रूप में शुरुआत करने वाले कलुगमगे को चोटों ने दिशा बदलने पर मजबूर किया. 2021 में उन्होंने लेग स्पिन की राह पकड़ी. कोच जॉन डेविसन के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी कला को तराशा, एक नई पहचान गढ़ी. आज वही नाजुक उंगलियों का कमाल, वही कलाई का जादू - ‘पिज्जा स्पिन’- इटली की क्रिकेट पहचान बन चुका है.

स्टैंड-इन कप्तान हैरी मानेन्ती ने मैच के बाद कहा कि टीम के 15 में से 12 खिलाड़ी क्रिकेट के बाहर काम करते हैं. कोई अकाउंटेंट है, कोई मजदूर, कोई हॉस्पिटैलिटी स्टाफ... ये सब ‘डबल लाइफ’ जीते हैं- दिन में नौकरी, शाम को राष्ट्रीय टीम.

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मानेन्ती का सपना है कि एक दिन इटली में क्रिकेट इतना बड़ा हो जाए कि खिलाड़ियों को एप्रन और ऑफिस बैज उतारकर सिर्फ नीली जर्सी पहननी पड़े. वे जानते हैं कि हर मैच में वे अंडरडॉग रहेंगे- चाहे सामने नेपाल हो, स्कॉटलैंड हो या इंग्लैंड. लेकिन उनका लक्ष्य सिर्फ हिस्सा लेना नहीं, रैंकिंग में ऊपर चढ़ना है.

यह सफलता सिर्फ जीत नहीं, बल्कि इटली में क्रिकेट के भविष्य का घोषणापत्र है. यह संदेश है कि फुटबॉल की धरती पर भी क्रिकेट ने अपनी छोटी-सी, मगर मजबूत जगह बना ली है. अब जरूरत है समर्थन, अवसर और विश्वास की ...ताकि अगली पीढ़ी को अपने सपनों के लिए पिज्जा ओवन की गर्मी में पसीना न बहाना पड़े.

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