सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के खिलाफ शनिवार (25 अप्रैल) को हुए हाई-स्कोरिंग मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स (RR) के रियान पराग की कप्तानी एक बार फिर चर्चा में आ गई. 229 रन का बड़ा टोटल खड़ा करने के बावजूद टीम जीत दर्ज नहीं कर सकी और इसकी बड़ी वजह गेंदबाजी में अपनाई गई रणनीति रही.
मैच में पराग ने अपने प्रमुख स्पिनर रवींद्र जडेजा और इम्पैक्ट प्लेयर रवि बिश्नोई को काफी देर तक गेंद नहीं थमाई. दोनों को 11वें ओवर के बाद अटैक में लाया गया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उन्हें सिर्फ एक-एक ओवर ही दिया गया.
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यह फैसला तब और चौंकाने वाला लगा जब हाल ही में जडेजा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बाएं हाथ के बल्लेबाज निकोलस पूरन को आउट किया था. इसके बावजूद पराग ने मैच में अपने स्पिनरों पर भरोसा नहीं दिखाया.
मैच के बाद पराग ने अपने फैसले का खुलकर बचाव किया. उन्होंने कहा- दो लेफ्ट-हैंडर बल्लेबाज थे और मुझे लगा कि मैं और डॉन (डोनोवन फरेरा ) विकेट लेने का बेहतर मौका बना सकते हैं. मैं चाहता था कि क्लासेन आएं और तब ज-बिश्नोई को इस्तेमाल करूं. लेकिन विकेट स्पिन के अनुकूल नहीं थी. ऐसे में तेज गेंदबाजों को विकेट लेना था और स्पिनरों का काम सिर्फ रन रोकना था.
रियान की रणनीति हुई फ्लॉप
रियान की यह रणनीति काम नहीं आई. पराग ने खुद पावरप्ले के बाद गेंदबाजी की और एक ओवर में 12 रन लुटाए. वहीं फरेरा ने जरूर एक सफलता दिलाई, उन्होंने अभिषेक शर्मा (57 रन, 29 गेंद) को आउट किया, लेकिन उससे पहले वह ईशान किशन के हाथों चौका-छक्का खा चुके थे.
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इस फैसले का असर यह रहा कि RR की गेंदबाजी बिखरी हुई नजर आई और टीम 229 रन का बड़ा स्कोर भी डिफेंड नहीं कर पाई. अब अगली चुनौती 28 अप्रैल को पंजाब किंग्स के खिलाफ होगी. पंजाब के पास टॉप ऑर्डर में दो बाएं हाथ के बल्लेबाज प्रियांश आर्य औ कूपर कोनोली हैं, जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर स्पिन को अच्छी तरह खेलते हैं. ऐसे में देखने वाली बात होगी कि पराग अपनी रणनीति पर कायम रहते हैं या फिर इस बार स्पिनर्स पर भरोसा दिखाते हैं.