इंग्लैंड की वनडे और टी20 टीम के कप्तान हैरी ब्रूक ने द हंड्रेड (The Hundred) 2026 को लेकर उठे विवाद पर खुलकर अपनी राय रखी है. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तानी खिलाड़ियों को इस साल द हंड्रेड की नीलामी में नजरअंदाज किया गया, तो यह शर्म की बात होगी.
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक द हंड्रेड की वो चार फ्रेंचाइजी 2026 सीजन की नीलामी में पाकिस्तान के खिलाड़ियों पर बोली नहीं लगाएगी, जिनमें आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) मालिकों की हिस्सेदारी है. आगामी सीजन 21 जुलाई से 16 अगस्त के बीच खेला जाएगा और इस बार खिलाड़ियों की सैलरी में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है.
यह भी पढ़ें: इस T20 लीग से आउट होंगे पाकिस्तानी खिलाड़ी! IPL फ्रेंचाइजीज ने उठाया बड़ा कदम
आठ में से चार टीमें मैनचेस्टर सुपर जायंट्स, एमआई लंदन, सदर्न ब्रेव और सनराइजर्स लीड्स अब आंशिक रूप से उन कंपनियों के स्वामित्व में हैं, जो आईपीएल से जुड़ी हुई हैं. 2008 के बाद से आईपीएल से जुड़ी फ्रेंचाइजी ने किसी भी पाकिस्तानी खिलाड़ी को अनुबंधित नहीं किया है. इसकी बड़ी वजह भारत-पाकिस्तान के बीच जारी राजनीतिक तनाव को माना जाता है. ब्रूक खुद इस बार सनराइजर्स लीड्स के लिए खेलेंगे, जिसे पहले नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स के नाम से जाना जाता था.
हैरी ब्रूक ने पूरे मामले पर क्या कहा?
हैरी ब्रूक ने श्रीलंका के खिलाफ इंग्लैंड के सुपर-8 मुकाबले से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हमारा फोकस अभी टी20 वर्ल्ड कप पर है. यह सीधे तौर पर हमारा मामला नहीं है. लेकिन पाकिस्तान कई सालों से एक महान क्रिकेटिंग देश रहा है. नीलामी में 50-60 खिलाड़ी होंगे. उनमें से कुछ को बाहर रखना वाकई निराशाजनक होगा. वे शानदार खिलाड़ी हैं और बड़ी संख्या में दर्शक भी लाते हैं. उनके होने से टूर्नामेंट और बेहतर बनता है.' ब्रूक का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि क्रिकेट को राजनीति से अलग रखना चाहिए और खेल की गुणवत्ता सर्वोपरि होनी चाहिए.
पूर्व इंग्लैंड कप्तान माइकल वॉन ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए. वॉन ने कहा, 'ECB को तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए. लीग उनकी है और इस तरह की स्थिति को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. यह देश का सबसे समावेशी खेल है, यहां किसी भी तरह का बहिष्कार नहीं होना चाहिए.'
द हंड्रेड की पहली बड़ी नीलामी 11 मार्च (विमेंस) और 12 मार्च (मेन्स) को होगी. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बर्मिंघम फोनिक्स, लंदन स्पिरिट, वेल्श फायर और ट्रेंट रॉकेट्स पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बोली लगाते हैं या नहीं. अगर पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह न केवल द हंड्रेड की प्रतिस्पर्धात्मकता बल्कि उसकी वैश्विक छवि पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है. क्रिकेट जगत की निगाहें अब इस नीलामी पर टिकी हैं.