पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर डेमियन मार्टिन ने मेनिनजाइटिस जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ाई जीतने के बाद अपने परिवार, दोस्तों और मेडिकल टीम का दिल से शुक्रिया अदा किया है. 26 दिसंबर को मार्टिन अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़े और उन्हें गोल्ड कोस्ट के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके बचने की संभावना 50 फीसदी बताई थी.
डॉक्टरों ने 54 वर्षीय डेमियन मार्टिन को उनकी स्थिति बिगड़ने पर इंड्यूस्ड कोमा (कृत्रिम कोमा) में डाल दिया था, ताकि उनका शरीर संक्रमण से लड़ सके. मेनिनजाइटिस दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड की झिल्लियों में सूजन पैदा करने वाली जानलेवा बीमारी है.
डेमियन मार्टिन ने X पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि 27 दिसंबर 2025 को उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी और उन्हें कुछ भी याद नहीं रहा. ऐसे में परिवार और डॉक्टरों के लिए वह समय बेहद मुश्किल था. कोमा से बाहर आने के बाद मार्टिन ना चल पा रहे थे और ना बोल पा रहे थे. लेकिन सिर्फ चार दिन के भीतर डॉक्टरों को चौंकाते हुए उन्होंने चलना और बातचीत शुरू कर दिया.
डेमियन मार्टिन ने लिखा, 'मेरे बचने का चांस 50/50 दिया गया था, लेकिन मैं बाहर आया. शुरू में मैं ना चल सकता था, ना बोल सकता था. चार दिन बाद मैंने दोनों कर दिखाया. डॉक्टर हैरान थे कि मैं इतनी जल्दी कैसे ठीक हो रहा हूं.' उन्होंने लिखा कि घर वापस आने और समुद्र किनारे रेत पर कदम रखने से उन्हें जीवन की कीमत का एहसास हुआ.
इस अनुभव ने डेमियन मार्टिन को सिखाया है कि जीवन पल भर में बदल सकता है और समय कितना अनमोल है. उन्होंने पैरामेडिक्स, डॉक्टरों, नर्सों, दोस्तों, परिवार और उन सभी लोगों का आभार जताया जिन्होंने संदेशों के जरिए उनका हौसला बढ़ाया. उन्होंने आगे लिखा, 'इस अनुभव ने मुझे दिखाया कि दुनिया में कितने शानदार लोग हैं. मैं हर उस व्यक्ति का शुक्रगुजार हूं, जिसने मेरा साथ दिया. 2026 का स्वागत है. मैं वापस आ गया हूं.'
ऐसा रहा मार्टिन का क्रिकेट करियर
डेमियन मार्टिन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 67 टेस्ट, 208 वनडे और 4 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले, जिनमें उन्होंने कुल 9872 रन बनाए. उन्होंने दिसंबर 1992 में वेस्टइंडीज के खिलाफ ब्रिसबेन में अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था और जल्द ही ऑस्ट्रेलियाई टीम के भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल हो गए.
मार्टिन 2004 में भारत में ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत के दौरान टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा थे. उन्होंने 1999 और 2003 में विश्व कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए अहम योगदान दिया. खासकर 2003 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत के खिलाफ उनकी 84 गेंदों में बनाई गई नाबाद 88 रनों की शानदार पारी हमेशा याद रखी जाती है. इस मैच में उन्होंने कप्तान रिकी पोंटिंग (140*) के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 234 रनों की अविजित साझेदारी कर ऑस्ट्रेलिया को विशाल स्कोर तक पहुंचाया था. मार्टिन ने 2006-07 की एशेज सीरीज में एडिलेड टेस्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले लिया था.