भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को सूचना का अधिकार (RTI) कानून के दायरे में लाने की मांग को केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने खारिज कर दिया है. आयोग ने सोमवार को साफ कहा कि BCCI कोई 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं है, क्योंकि यह न तो सरकार के स्वामित्व में है, न उसके नियंत्रण में और न ही इसे सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलती है.
यह मामला उस अपील से जुड़ा था, जिसमें पूछा गया था कि आखिर किस प्रावधान और अधिकार के तहत BCCI भारत का प्रतिनिधित्व करता है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए खिलाड़ियों का चयन करता है.
सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने अपने आदेश में कहा कि BCCI एक निजी और स्वायत्त संस्था है, जो तमिलनाडु सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत है. इसे न संविधान द्वारा बनाया गया है, न संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा स्थापित किया गया है और न ही किसी सरकारी अधिसूचना के जरिए इसका गठन हुआ है.
आयोग ने अपने फैसले में कहा, 'RTI एक्ट की धारा 2(h) के तहत BCCI को ‘पब्लिक अथॉरिटी’ नहीं माना जा सकता. इसलिए इस मामले में RTI कानून के प्रावधान BCCI पर लागू नहीं होते.'
इस फैसले के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो सकती है कि देश में क्रिकेट संचालन करने वाली सबसे प्रभावशाली संस्था होने के बावजूद BCCI को पारदर्शिता के दायरे में लाया जाना चाहिए या नहीं. इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट और लोढ़ा समिति की सिफारिशों के दौरान BCCI की जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं.