रूस का एक पुराना सैन्य उपग्रह 'लुच' 30 जनवरी 2026 को अंतरिक्ष में टूटकर कई टुकड़ों में बिखर गया. यह घटना पृथ्वी से बहुत ऊपर 'ग्रेवयार्ड ऑर्बिट' में हुई, जो जियोस्टेशनरी ऑर्बिट (GEO) से कुछ सौ किलोमीटर ऊपर है. GEO वह ऊंचाई है जहां मौसम, संचार और टीवी सैटेलाइट्स रहते हैं. ये ऑर्बिट लगभग 36,000 किमी ऊपर है.
उपग्रह क्या था और क्यों चर्चा में?
लुच उपग्रह को 2014 में रूस ने लॉन्च किया था. यह रक्षा मंत्रालय और FSB (रूसी खुफिया एजेंसी) के लिए बनाया गया था. पश्चिमी विशेषज्ञ इसे 'इंस्पेक्टर' या जासूसी सैटेलाइट मानते थे. यह GEO में अन्य सैटेलाइट्स के पास पहुंचकर उनकी जासूसी करता था.
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इसमें अमेरिकी Intelsat सैटेलाइट्स और फ्रांसीसी मिलिट्री सैटेलाइट्स के पास रुककर संदिग्ध गतिविधियां की गईं थीं. 2025 अक्टूबर में इसका ईंधन खत्म होने पर इसे रिटायर कर ग्रेवयार्ड ऑर्बिट में भेज दिया गया था.
क्या हुआ 30 जनवरी को?
स्विस कंपनी s2A Systems ने ग्राउंड-बेस्ड ऑप्टिकल इमेजरी से एक छोटा टाइम-लैप्स वीडियो जारी किया. इसमें दिखा कि सुबह 6:09 UTC (भारत में लगभग 11:39 AM IST) पर उपग्रह अचानक चमका, टूटा और कई टुकड़ों में बिखर गया. वह घूमने लगा और उसके आसपास नए ऑब्जेक्ट्स दिखे.
कारण क्या हो सकता है?
खगोल वैज्ञानिक जोनाथन मैकडॉवेल का कहना है कि संभवतः अंतरिक्ष के कचरे से टकराव हुआ है. सामान्य रूप से रिटायर सैटेलाइट को 'पैसिवेट' किया जाता है – यानी बाकी ईंधन, बैटरी आदि को खाली कर दिया जाता है ताकि विस्फोट न हो. लेकिन शायद लुच पूरी तरह पैसिवेट नहीं था.
अगर डेब्री से टक्कर हुई, तो यह GEO और ग्रेवयार्ड ऑर्बिट में कचरे की समस्या को और गंभीर दिखाता है. यह चिंता की बात है, क्योंकि ऊपर का माहौल पहले से ज्यादा खतरनाक हो सकता है.
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क्या खतरा है?
यह ग्रेवयार्ड ऑर्बिट में हुआ, लेकिन टुकड़े GEO के करीब रह सकते हैं. GEO में हजारों महत्वपूर्ण सैटेलाइट्स हैं – संचार, GPS, मौसम पूर्वानुमान, टीवी आदि. नए टुकड़े ट्रैकेबल हैं. अन्य सैटेलाइट्स से टकरा सकते हैं, जिससे 'केश-डे ब्रेकअप' जैसी श्रृंखला शुरू हो सकती है.
अंतरिक्ष में कचरा बढ़ रहा है क्योंकि सैटेलाइट्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है. रूस ने इस घटना पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है. यह घटना अंतरिक्ष सुरक्षा की बड़ी चुनौती दिखाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि सैटेलाइट्स को रिटायर करते समय बेहतर पैसिवेशन जरूरी .
स्पेस डेब्री कम करने के लिए वैश्विक नियमों की सख्त जरूरत है. अंतरिक्ष अब सिर्फ वैज्ञानिक नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी (इंटरनेट, बैंकिंग, मौसम) का आधार है – इसलिए इस समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.