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Sarmat ICBM: रूस ने दागी दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइल, कहते हैं- 'दूसरा शैतान'

रूस (Russia) ने एक महाद्वीप से दूसरे पर हमला करने की क्षमता रखने वाली ताकतवर बैलिस्टिक मिसाइल सरमत (Sarmat ICBM) का सफल परीक्षण किया. यह एक परमाणु मिसाइल है. इसे लेकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि इस सफल परीक्षण के बाद हमारे दुश्मनों को कोई भी कदम उठाने से पहले सोचना होगा.

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इस मिसाइल का परीक्षण उत्तरी रूस के प्लेसेत्सक कॉस्मोड्रोम से किया गया है. (फोटोः रॉयटर्स) इस मिसाइल का परीक्षण उत्तरी रूस के प्लेसेत्सक कॉस्मोड्रोम से किया गया है. (फोटोः रॉयटर्स)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 1 सेकेंड में 7.1KM की गति
  • एक साथ 15 टारगेट पर हमला
  • 18 हजार किलोमीटर है रेंज

रूस ने अपनी नई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल सरमत (Sarmat ICBM) का सफल परीक्षण किया है. यह बेहद खतरनाक और विध्वंसकारी मिसाइल है. यह अपने साथ परमाणु हथियार लेकर जा सकती है. इसके ऊपर 10 या उससे अधिक वॉरहेड्स लगाए जा सकते हैं. इसे बनाने की शुरुआत साल 2000 में हुई थी. इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी धोखा दे सकती है. 

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि 2000 टन से ज्यादा वजनी यह मिसाइल दुनिया के किसी भी कोने में हमला कर सकता है. वहीं, रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि सरमत के पास तबाही की सबसे ज्यादा लंबी रेंज है. इस मिसाइल का परीक्षण उत्तरी रूस के प्लेसेत्सक कॉस्मोड्रोम से किया गया है. 

रूस की नेविगेशन प्रणाली पर चलती है ये मिसाइल. (फोटोः रॉयटर्स)
रूस की नेविगेशन प्रणाली पर चलती है ये मिसाइल. (फोटोः रॉयटर्स)

Sarmat ICBM की लंबाई 35.5 मीटर है. इसका व्यास 3 मीटर है. सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर इसके बारे में जो जानकारी है, उसके मुताबिक इसके ऊपर 10 से 15 वॉर हेड लगाए जा सकते हैं. ये वॉरहेड पारंपरिक भी हो सकते हैं. या फिर परमाणु भी हो सकते हैं. यानी एक साथ 15 स्थानों पर इससे हमला किया जा सकता है. 

'पहले शैतान' यानी R-36M आईसीबीएम मिसाइल की जगह इसे लाया गया है. (फोटोः रॉयटर्स)
'पहले शैतान' यानी R-36M आईसीबीएम मिसाइल की जगह इसे लाया गया है. (फोटोः रॉयटर्स)

Sarmat ICBM की रेंज 18 हजार किलोमीटर है. यानी रूस अपनी सीमा में रहकर भी दुनिया के किसी भी कोने में हमला कर सकता है. यह मिसाइल 20.7 मैक की स्पीड से उड़ती है. यानी 25,560 किलोमीटर प्रतिघंटा. मतलब एक सेकेंड में यह 7.1 किलोमीटर पार कर जाएगी. इसका गाइडेंस सिस्टम रूस द्वारा विकसित नेविगेशन प्रणाली ग्लोनास (GLONASS) पर आधारित है. 

सरमत मिसाइल को 'दूसरा शैतान' भी बुलाया जाता है. इसे बनाने की शुरुआत साल 2009 में हुई थी. मकसद था रूस के 'पहले शैतान' यानी R-36M आईसीबीएम मिसाइल की जगह इसे लाना. रूस ने यूक्रेन युद्ध के दौरान इस मिसाइल का पहली बार परीक्षण किया है. इस साल के अंत तक इस मिसाइल को रूस की मिलिट्री में शामिल कर लिया जाएगा. 

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