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साइंस न्यूज़

घोड़े के खुर के निशान में मिला 460 करोड़ साल पुराना दुर्लभ उल्कापिंड

460 Crore Year Old Rare Meteorite
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इंग्लैंड के एक मैदान में घोड़े के खुर के निशान के अंदर 460 करोड़ साल पुराना दुर्लभ उल्कापिंड (Meteorite) का टुकड़ा मिला है. यह दुर्लभ इसलिए हैं क्योंकि यह कार्बोनेसियस कोंड्राइट (Carbonaceous Chondrite) है. यानी इसमें जीवन की उत्पत्ति के सबूत हैं, या फिर यह प्राचीन जीवन के सबूत दे सकता है. धरती पर गिरने वाले उल्कापिंडों में सिर्फ 4% से 5% उल्कापिंड ही इस दुर्लभ श्रेणी में शामिल होते हैं. इसकी उम्र से सौर मंडल के कई राज खुल सकते हैं. (फोटोः गेटी)

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इंग्लैंड (England) के लोबोरो (Loughborough) के निवासी और ईस्ट एंगलियन एस्ट्रोफिजिकल ऑर्गेनाइजेशन (EAARO) में एस्ट्रोकेमिस्ट्री के डायरेक्टर डेरेक रॉबसन ने उल्कापिंड के इस टुकड़े को एक खेत से खोजा था. वहां पर घोड़े के खुर के निशान के अंदर ये पत्थर दबा था. यह पत्थर दुर्लभ कार्बोनेसियस कोंड्राइट (Carbonaceous Chondrite) है. ये सौर मंडल के मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह के बीच की एस्टेरॉयड बेल्ट से धरती पर आते हैं. (फोटोः डेरेक रॉबसन)

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इसके अलावा कार्बोनेसियस कोंड्राइट (Carbonaceous Chondrite) उल्कापिंडों में अक्सर जीवन के सबूत मिल जाते हैं. या फिर कार्बन संबंधित ऐसे मिश्रण जो प्राचीन जीवन का संकेत दे सकते हैं. कई बार इनमें अमिनो एसिड के सबूत मिलते हैं, जिनकी वजह से जीवन की शुरुआत होती है. इसलिए इन उल्कापिंडों को दुर्लभ कहा जाता है. क्योंकि ये सौर मंडल में जीवन की उत्पत्ति के शुरुआती सबूत देने में सक्षम हैं. बस शर्त ये है कि उनमें जैविक पदार्थों के अंश हों. (फोटोः गेटी)

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सौर मंडल से आए अन्य अंतरिक्षीय कचरे (Space Debris) की तरह इसमें वायुमंडल में आने के बाद से टकराहट से बनने वाले निशान और गर्मी के सबूत नहीं हैं. साथ ही ऐसे संकेत भी नहीं मिले जिनसे यह पता चलता हो कि हमारे सौर मंडल के ग्रह और चांद कैसे बने हैं. लोबोरो यूनिवर्सिटी (Loughborough University) के माइक्रोस्कोपिस्ट शॉन फाउलर ने एक बयान में कहा कि ऐसा लगता है कि यह किसी अन्य ग्रह के निर्माण से पहले ही मंगल ग्रह के आसपास मौजूद था. यानी हमारे प्राचीन इतिहास का पता लगाने का यह एक बेहतरीन मौका है. (फोटोः  Derek Robson / The Loughborough Materials Characterisation Centre)

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शॉन फाउलर ने बताया कि उल्कापिंड का यह टुकड़ा छोटा है. चारकोल के रंग का और कमजोर है जैसे भुरभुराता हुआ कॉन्क्रीट होता है. यह उल्कापिंड ओलिविन (Olivin) और फाइलोसिलिकेट्स (Phyllosilicates) से बना है. इसके बीच-बीच में गोल आकार के दाने हैं, जिन्हें कोंडरूल्स (Chondrules) कहते हैं. यह दाने उस समय बनते हैं जब किसी एस्टेरॉयड का निर्माण होता है और वह बेहद गर्म होता है. (फोटोः The Loughborough Materials Characterisation Centre)

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शॉन ने बताया कि धरती पर मिलने वाली किसी भी ऐसी वस्तु की तुलना में इसकी संरचना और निर्माण की प्रक्रिया एकदम उलट है. हमें आजतक उल्कापिंड के किसी टुकड़े में ऐसी बनावट या आकृतियां या फिर संरचना के लिए दुर्लभ पदार्थ नहीं दिखे, जो इसमें हैं. हो सकता है कि और जांच करने पर यह पता चले कि इसकी रसायनिक संरचना किसी अन्य एस्टेरॉयड के टुकड़े से मिल जाए लेकिन इसकी बनावट एकदम अलग है. ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया. (फोटोः The Loughborough Materials Characterisation Centre)

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लोबोरो यूनिवर्सिटी और EAARO के शोधकर्ताओं ने इसकी संरचना जांचने के लिए इसे इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप के नीचे रखा गया. ताकि नैनोमीटर के स्तर पर इसकी संरचना देखी जा सके. इसके अलावा वाइब्रेशनल स्पेक्ट्रोस्कोपी (Vibrational Spectroscopy) और एक्स-रे डिफ्रैक्शन (X-Ray Diffraction) भी की गई ताकि पत्थर की बारीकी से जांच की जा सके. रसायनिक संरचनाओं और ढांचों की अलग-अलग तस्वीर ली जा सके. (फोटोः गेटी)

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अब भी इस पत्थर की जांच जारी है. शोधकर्ता इसे हर स्तर पर जांच रहे हैं ताकि इसके अंदर अमीनो एसिड की पहचान, सबूत या संकेत को खोजा जा सके. अगर इसमें अमीनो एसिड मिलता है, तो सौर मंडल में जीवन की उत्पत्ति का नया राज खुलेगा. अगर अमीनो एसिड मिलता है तो यह खुलासा हो सकता है कि 460 करोड़ साल पहले से सौर मंडल में जीवन की शुरुआत हो गई थी. या फिर उसके निर्माण की प्रक्रिया शुरु हो गई थी. (फोटोः गेटी)

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लोबोरो यूनिवर्सिटी की केमिस्ट सैंडी डैन्न ने कहा कि इस समय हम सिर्फ इतना जानते हैं कि यह बेहद दुर्लभ कार्बोनेसियस कोंड्राइट (Carbonaceous Chondrite) है. हमनें बहुत हल्की सी जांच की है. इसका पूरा अध्ययन करने के बाद सौर मंडल से संबंधित कई नए खुलासे होने की संभावना है. साथ ही यह भी पता चलेगा कि क्या इतने पुराने पत्थर में छिपे सबूत प्राचीन जीवन पर कोई रोशनी डाल सकते हैं. (फोटोः गेटी)