Kubera ji ki Aarti: मान्यता है कि कुबेर भगवान धन और ऐश्वर्य के देवता हैं. उन्हें धन का दान करने से वे प्रसन्न होते हैं. कुबेर को धनिया, कमलगट्टा, इत्र, सुपारी, लौंग, लाल पुष्प, इलायची, और दूर्वा बहुत पसंद हैं. कुबेर भगवान की मूर्ति को घर की उत्तर दिशा में रखना शुभ माना जाता है. इस दिशा में मूर्ति रखने से सुख-शांति और धन-दौलत में बढ़ोतरी होती है. हर दिन भगवान कुबेर की पूजा के साथ उनकी आरती भी करनी चाहिए.
कुबेर जी की आरती
ऊं जय यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के,
भण्डार कुबेर भरे।
॥ ऊं जय यक्ष कुबेर हरे...॥
शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से,
कई-कई युद्ध लड़े ॥
॥ ऊं जय यक्ष कुबेर हरे...॥
स्वर्ण सिंहासन बैठे,
सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं,
सब जय जय कार करैं॥
॥ ऊं जय यक्ष कुबेर हरे...॥
गदा त्रिशूल हाथ में,
शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन,
धनुष टंकार करे॥
॥ ऊं जय यक्ष कुबेर हरे...॥
भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं,
साथ में उड़द चने॥
॥ ऊं जय यक्ष कुबेर हरे...॥
यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत प्रेमपाल स्वामी,
मनवांछित फल पावे।
॥ इति श्री कुबेर आरती ॥
कुबेर देव का मंत्र
जपतामुं महामन्त्रं होमकार्यो दिने दिनेभुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।। जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा।।
दशसंख्य: कुबेरस्य मनुनेध्मैर्वटोद्भवै