Gayatri Mantra: मंत्रों में गायत्री मंत्र को सबसे प्रभावशाली माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के आधार पर ब्रह्म देव जब सृष्टि की रचना के प्रारंभ में थे, तब उन पर गायत्री मंत्र प्रकट हुआ था. उन्होंने ही सर्वप्रथम गायत्री माता का आह्वान किया और अपने मुख से गायत्री मंत्र की व्याख्या की. इस तरह से गायत्री माता का प्रकाट्य हुआ. गायत्री माता से ही चारों वेद, शास्त्र आदि का जन्म हुआ.
क्या है गायत्री मंत्र?
गायत्री मंत्र मुख्यतः वेदों की ऋचा है. यह मुख्यतः यजुर्वेद और ऋग्वेद के दो भागों से मिलकर बना है. इस ऋचा में मुख्यतः ईश्वरीय प्रकाश (सविता) की आराधना की गई है, इसलिए इसको सावित्री भी कहा जाता है. इस मंत्र के जाप से भौतिक और आध्यात्मिक दोनों तरह की उपलब्धियां प्राप्त होती हैं. जिस तरह की प्रार्थना के साथ गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है, इसकी उपलब्धि भी वैसी ही होती है. शिक्षा एकाग्रता और ज्ञान के लिए गायत्री मंत्र सर्वश्रेष्ठ है.
क्या है गायत्री मंत्र का अर्थ?
गायत्री मंत्र की महिमा का जितना गुणगान किया जाए कम है, क्योंकि गायत्री मंत्र में वो शक्ति है कि यह जीवन से जुड़ी हर समस्या को हल कर सकता है. आइए आपको इसके शब्दों का अर्थ बताते हैं.
ऊँ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्॥
ॐ - प्रणव
भूर- मनुष्य को प्राण प्रदान करने वाला
भुवः- दुख़ों का नाश करने वाला
स्वः- सुख़ प्रदान करने वाला
तत- वह सवितुर - सूर्य की भांति उज्जवल
वरेण्यं- सबसे उत्तम
भर्गो- कर्मों का उद्धार करने वाला
देवस्य- प्रभु
धीमहि- आत्म चिंतन के योग्य (ध्यान)
धियो- बुद्धि, यो - जो, नः - हमारी, प्रचोदयात् - हमें शक्ति दें
गायत्री मंत्र जपने का समय
गायत्री मंत्र का जाप प्रात:काल या सूर्योदय से थोड़ी देर पहले किया जाना चाहिए. गायत्री मंत्र का जप दोपहर के समय भी किया जा सकता है. शाम के समय गायत्री मंत्र का जाप सूर्यास्त के कुछ देर पहले आरंभ कर देना चाहिए और सूर्यास्त के कुछ समय बाद तक जप करना चाहिए.
गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?
सुबह या शाम का गायत्री मंत्र के लिए उत्तम माना जाता है. पीले वस्त्र धारण करके गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए. वैवाहिक जीवन के लिए चंदन या हल्दी की माला का प्रयोग करें. मंत्र जाप के पहले गुरु वंदना कर लें. मंत्र जाप के बाद जो भी इच्छा है उसके पूर्ण हो जाने की प्रार्थना करें. जो भी लोग गायत्री का जाप करें, वे पूर्ण रूप से सात्विक रहें. खान पान में सावधानी आवश्यक है.