बजरंगबली आदिदेव महादेव का अवतार हैं जिनका नाम लेने भर से सभी संकट टल जाते हैं. मंगलवार को महाबली हनुमान की उपासना तो सब करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर वो कौन सी चीजें हैं जो हनुमान जी को सर्वशक्तिमान बनाती हैं. आज हम आपको उन्हीं दिव्य शक्तियों और निधियों के बारे में बताने वाले हैं. आइए जानते हैं महाबली हनुमान की अपरंपार शक्तियों और अथाह निधियों का रहस्य....
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता...
अस बर दीन्ह जानकी माता....
हनुमान चालीसा की ये चौपाइयां तो आपने सुनी ही होंगी लेकिन क्या आपको इनका सही अर्थ मालूम हैं?
क्या है सिद्धियों और निधियों का महत्व
श्रीराम भक्त हनुमान को आठ सिद्धियों और नौ निधियों का वरदान मां जानकी ने दिया था और कहते हैं कि इन्हें संभालने की शक्ति भी केवल महाबली हनुमान में ही थी.
- दुनिया में सबसे कीमती वस्तुएं हैं- नौ निधियां जिन्हें पा लेने के बाद किसी भी प्रकार के धन और संपत्ति की आवश्यकता नहीं रहती हैं.
- इसी प्रकार अष्ट सिद्धियां दुनिया की सबसे बड़ी ताक़त हैं, जिन्हें पा लेने के बाद व्यक्ति सर्व-शक्तिमान हो जाता है
- ये निधियां और सिद्धियां सामान्य दशा में नहीं मिल सकती
- इन्हें पाने के लिए भगवान की विशेष कृपा जरूरी है
- निधियों और सिद्धियों पा लेना ही बड़ी बात नहीं होती, इन्हें अपने पास रख पाना भी बेहद मुश्किल होता है
- जरा सी चूक हो जाने पर ये निधियां और सिद्धियां छिन भी सकती हैं
- केवल हनुमान जी ही ऐसे देव हैं जो अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों से सम्पन्न हैं
- और हनुमान जी की पूजा उपासना करने से ये सिद्धियां और निधियां प्राप्त भी की जा सकती हैं
केवल हनुमान जी की ही कृपा से व्यक्ति को ये आठ सिद्धियां और नौ निधियां मिल सकती हैं लेकिन आश्चर्य की बात ये कि महाबली हनुमान की भक्ति करने वालों को ना ही किसी सिद्धि की चाह होती है, ना ही निधि की कामना. जानकारों की मानें तो अगर किसी व्यक्ति को ये सिद्धियां या निधियां प्राप्त हो जाएं तो वो संसार की कोई भी चीज हासिल कर सकता है.
सिद्धियों और निधियों की महिमा ?
- कुल मिलाकर प्रकार आठ सिद्धियां हैं- अणिमा, लघिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व और वशित्व
- जो वस्तुएं बहुत दुर्लभ होती हैं वो निधियां कहलाती हैं, इनका उल्लेख ब्रह्माण्ड पुराण एवं वायु पुराण में मिलता है
- इनमें से नौ प्रमुख निधियां हैं ...रत्न किरीट, केयूर, नुपूर, चक्र, रथ, मणि, भार्या , गज, और पद्म
- कुबेर के पास भी नौ निधियां हैं पर वो इन्हें किसी दूसरे को देने में असमर्थ हैं
- कुबेर की नौ निधियां हैं - पद्य, महापद्य, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील और खर्व