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क्यों भक्तों से रूठे हैं भोले भंडारी?

बाबा बर्फानी हो गए हैं अंतर्ध्यान. क्या भक्तों से रुठ गए हैं बाबा बर्फानी? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि अमरनाथ यात्रा  पूरी होने से पहले ही बाबा बर्फानी अंतर्ध्यान हो गए हैं. पवित्र गुफा में जिस शिवलिंग का आकार कई फीट का हुआ करता था, अब  वो पूरी तरह पिघल चुका हैं . अब अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले भक्तों को केवल पवित्र गुफा के ही दर्शन होंगे, प्राकृतिक रूप से  बनने वाले शिवलिंग के नहीं.

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बाबा बर्फानी हो गए हैं अंतर्ध्यान. क्या भक्तों से रुठ गए हैं बाबा बर्फानी? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि अमरनाथ यात्रा  पूरी होने से पहले ही बाबा बर्फानी अंतर्ध्यान हो गए हैं. पवित्र गुफा में जिस शिवलिंग का आकार कई फीट का हुआ करता था, अब  वो पूरी तरह पिघल चुका हैं . अब अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले भक्तों को केवल पवित्र गुफा के ही दर्शन होंगे, प्राकृतिक रूप से  बनने वाले शिवलिंग के नहीं.

हर-हर महादेव के जयघोष के साथ बड़े ही उल्लास के साथ शुरू हुई थी अमरनाथ यात्रा. लेकिन यात्रा शुरू होने के 18 दिन बाद बाबा बर्फानी अंतर्ध्यान होने लगे. 14 फीट का शिवलिंग पिघलकर पहले ही रहस्यमयी तरीके से छोटा हो गया. हम आपको बता दें कि ये तस्वीरें 13 जुलाई की हैं. जबकि 14 जुलाई को बाबा बर्फानी का आकार महज कुछ इंच का रह गया.

मान्यताओं के मुताबिक अमरनाथ में साक्षात शिव और पार्वती का वास है, कहते हैं कि शिव और शक्ति की मौजूदगी से ही हर साल यहां अपने आप बर्फ की मूरत में लाखों भक्तों को दर्शन देने के लिए महादेव प्रकट होते हैं. बर्फ की इसी पवित्र मूर्ति को शिवलिंग कहा जाता है. अभी तक भक्तों को 55 दिनों तक दर्शन देकर महादेव अंतर्ध्यान हो जाते थे, लेकिन अब केदारनाथ की तरह ही अमरनाथ ने भी भक्तों से मुंह मोड़ लिया है.

वैसे इस बार यात्रा शुरु होने के पहले से ही बाबा बर्फानी अपने भक्तों से रूठे हैं. 14 मई को बाबा बर्फानी का आकार 16 फीट था. महीने भर में ये घटकर 9 फीट रह गया और अब ये महज कुंछ इंच का रह गया है. बाबा बर्फानी का अंतर्ध्यान होने से उन श्रद्धालुओं को मायूसी होगी जो अभी यात्रा के लिए आने वाले हैं.

बाबा बर्फानी की यात्रा 28 जून को पूरे जोश और उत्साह के साथ शुरु हुई थी. लाखों भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले. लेकिन दो हफ्तों में ही अमरनाथ गुफा को छोड़ गये महादेव. जबकि अमरनाथ यात्रा अभी 21 अगस्त तक जारी रहेगी, ऐसे में भक्त हैरान हैं कि अब वो पवित्र गुफा में रूठे नाथ को कैसे मनाएगे.

28 जून से अमरनाथ की यात्रा शुरू हुई, अभी तक करीब ढाई लाख भक्त बर्फानी बाबा के दर्शन कर चुके हैं. जबकि साढ़े तीन लाख भक्त अमरनाथ पहुंच सकते हैं, हर दिन हजारों श्रद्धालु पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर रहे है, लेकिन पहली बार भक्त पवित्र गुफा में महादेव की नाराजगी को महसूस कर रहे हैं, दर्शन करके लौटे भक्त बताते है कि महादेव का अंतर्ध्यान होना उनकी क्रोधलीला है.

कोई पहली बार अमरनाथ की यात्रा पर आया है, तो कोई कई बार आ चुका है, बाबा बर्फानी के अंतर्ध्यान होने की खबर से भक्त बेहद दुखी हैं, उन्हें अब अमरनाथ गुफा में उस शिव लिंग के दर्शन नहीं हो पायेंगे जिस के लिए वो इतनी कठिन यात्रा करके पहुंचते हैं

अमरनाथ यात्रा पर जाने की इच्छा एक बार हर शिव भक्त के मन में होती है, क्योंकि अमरनाथ की पवित्र गुफा में विराजमान महादेव का स्वरूप किसी चमत्कार से कम नहीं. बर्फानी बाबा का ये रूप न केवल अपने आप प्रकृति बनाती है, बल्कि इस दौरान इसमें साक्षात महादेव आकर वास करते हैं.

कहा जाता है कि गुफा में मौजूद शिवलिंग के ऊपर बूंद बूंद जल टपकता है. उसी जल के जमने से ये शिवलिंग बनता है, माना जाता है कि ये जल रामकुंड से टपकता है, जो गुफा के बिल्कुल ऊपर है. मान्यता के मुताबिक पूर्णिमा की रात को शिवलिंग अपने पूरे आकार में होता है और पूर्णिमा के बाद जैसे-जैसे चांद का आकार घटता जाता है, वैसे-वैसे शिवलिंग का आकार भी घटता जाता है.

लेकिन अमरनाथ में भोले भंडारी ऐसे रूठे कि पहाड़ों पर पड़ रही गर्मी से महादेव पहले ही अंतर्ध्यान हो गये. मौसम विभाग भी मानता है कि शिवलिंग के पिघलने के पीछे अचानक बढ़ी गर्मी है.

धर्म से जुड़े लोग मानते हैं कि मौसम का अचानक गर्म होना महादेव का क्रोध ही है. पहले यात्रा शुरू होते वक्त बारिश ने भक्तों को रोका था और अब खुद महादेव पवित्र गुफा छोड़ गये, जिसका मलतब है कि अभी नाथ की नाराजगी दूर नहीं हुई है.

आखिर क्यों अमरनाथ की पवित्र गुफा से अंतर्ध्यान हो गये भोले भंडारी. क्यों करीब दो हफ्तों में पिघल गया शिवलिंग. धर्म में आस्था रखने वालों के लिए ये एक बड़ा सवाल है. लेकिन वैज्ञानिकों की मानें तो इस साल अमरनाथ में पिछले सालों के मुकाबले ज्यादा गर्मी पड़ी, जिसकी वजह से बर्फ का शिवलिंग पिघल गया.

आस्था की अमरनाथ गुफा के जाते हुए रास्ते सूखे और सपाट पड़े हैं. अमूमन इस वक्त जिन रास्तों पर बर्फ ही बर्फ दिखाई पड़ती है, वहां बर्फ का नामोनिशान नहीं है.

अमरनाथ गुफा में पाइप से पानी निकल रहा है. अमरनाथ गुफा में इस वक्त पानी बहने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि इस समय बर्फ ही बर्फ होती है. इस साल घाटी में तापमान 37 डिग्री तक पहुंचा है.

भारी भीड़ की वजह से अमरनाथ गुफा के आसपास का तापमान और बहुत बढ़ गया. हालांकि श्राइन बोर्ड ने दावा किया था कि पिछले दो-तीन साल में उन्होंने कुछ ऐसे उपाय किए हैं जिससे गुफा तापमान ना बढ़े.

2013 में 16 फीट से बाबा बर्फानी 9 की रह गए, इससे पहले 2012 में शिवलिंग का आकार 22 फीट से घटकर 14 फीट गया था. साल 2011 में 16 फीट के बाबा बर्फानी के दर्शन दिए थे जो महज 5 दिनों में 4 फीट तक पिघल गए. और साल 2010 में 12
फीट के शिवलिंग का आकार पिघलकर पहले 6 फीट हुआ और बाद में 3 फीट हो गया और एक महीने की यात्रा खत्म होते होते बाबा बर्फानी पूरी तरह अंतर्धान हो गए.

हर तीर्थ स्थान पर भक्तों में मायूसी
क्या केदारनाथ, क्या कैलाश मानसरोवर और क्या अमरनाथ, महादेव ऐसे रूठे हैं कि हर तीर्थ स्थान पर भक्तों को मायूसी ही हाथ लग रही है. पहले जलप्रलय से महादेव ने केदार छोड़ दिया, फिर खराब मौसम के चलते कैलाश मानसरोवर यात्रा रोकनी पड़ा और अब अमरनाथ की पवित्र गुफा में महादेव अंतर्ध्यान हो गये. धर्म से जुड़े जानकार मानते हैं कि देवभूमि पर आए जलप्रलय के बाद से ही नाथ कुपित हैं. नाथ ने अपनी तीसरी आंख खोलकर उतराखंड को तबाह कर दिया, चारों धाम की यात्रा रूकी हुई है, लेकिन अब अमरनाथ में भगवान शिव की अंतर्ध्यान होने से साफ है कि नाथ की नाराजगी अभी दूर नहीं हुई है.

लेकिन केदार में आई जलप्रलय भी भक्तों की आस्था को नहीं डिगा सकी. भक्तों को लगा अमरनाथ में भोले भंडारी को मना लेंगे. तमाम दिक्कतों के बावजूद भक्ति का सैलाब अमरनाथ में उमड़ पड़ा.

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