Vijaya Ekadashi 2024: फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस साल विजया एकादशी आज 6 मार्च को मनाई जा रही है. किसी भी कार्य की शुरुआत के लिए विजया एकादशी के दिन को काफी शुभ माना जाता है. साथ ही इस दिन किए गए काम में व्यक्ति को हमेशा सफलता प्राप्त होती है. विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है.
विजया एकादशी कथा (Vijaya Ekadashi katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में धर्मराज युद्धिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण के सामने फाल्गुन एकादशी के महत्व के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की. भगवान श्री कृष्ण ने फाल्गुन माह की एकादशी के महत्व व कथा के बारे में बताते हुए कहा, हे कुंते कि सबसे पहले नारद मुनि ने ब्रह्मा जी से फाल्गुन कृष्ण एकादशी व्रत की कथा व महत्व के बारे में जाना था, उनके बाद इसके बारे में जानने वाले तुम्हीं हो.
त्रेता युग में जब रावण ने माता सीता का हरण किया तो भगवान श्रीराम ने सुग्रीव की वानर सेना के साथ मिलकर लंका पर युद्ध करने के लिए प्रस्थान किया. लंका पहुंचने के लिए पहले विशाल समुद्र ने उनका रास्ता रोक लिया. समुद्र में बहुत ही खतरनाक समुद्री जीव थे जो वानर सेना को हानि पहुंचा सकते थे. चूंकि श्री राम मानव रूप में थे इसलिये वह इस गुत्थी को उसी रूप में सुलझाना चाहते थे.
उन्होंने लक्ष्मण से समुद्र पार करने का उपाय जानना चाहा तो लक्ष्मण ने कहा कि हे प्रभु वैसे तो आप सर्वज्ञ हैं फिर भी यदि आप जानना ही चाहते हैं तो मुझे भी इसका कोई उपाय नहीं सुझ रहा. लेकिन यहां से आधा योजन की दूरी पर वकदालभ्य मुनिवर निवास करते हैं, उनके पास इसका कुछ न कुछ उपाय हमें अवश्य मिल सकता है. लक्ष्मण की यह बात सुनकर भगवान श्री राम उनके पास पंहुच गये.
उन्हें मुनिवर को प्रणाम किया और अपनी समस्या उनके सामने रखी. तब मुनि ने उन्हें बताया कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को यदि आप समस्त सेना सहित उपवास रखें तो आप समुद्र पार करने में तो कामयाब होंगे ही साथ ही इस उपवास के प्रताप से आप लंका पर भी विजय प्राप्त करेंगे. समय आने पर मुनि वकदालभ्य द्वारा बतायी गई विधिनुसार भगवान श्री राम सहित पूरी सेना ने एकादशी का उपवास रखा और रामसेतु बनाकर समुद्र को पार कर रावण को परास्त किया.
विजया एकादशी पूजन विधि (Vijaya Ekadashi Pujan Vidhi)
एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और पीले चन्दन, पीले फूल, पीली मिठाई, लौंग और सुपारी इत्यादि से पूजन करें. धूप दीप जलाएं और एकादशी की कथा सुने और मन ही मन विष्णु जी से अपनी समस्या कहें. कथा सम्पूर्ण होने पर श्रीविष्णु जी की आरती करें. ब्राह्मणों और जरूरतमंद लोगों को सामर्थ्य अनुसार दान भी दें उसके बाद स्वयं खाना खाएं.