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मासिक शिवरात्रि, सावन शिवरात्रि और फाल्गुन की महाशिवरात्रि में क्या अंतर है? जानें

हर व्यक्ति के मन में यह सवाल आता है कि क्या हर शिवरात्रि एक जैसी होती है? तो आइए महाशिवरात्रि के मौके पर जानते हैं मासिक शिवरात्रि, सावन शिवरात्रि और फाल्गुन की महाशिवरात्रि में छिपा आध्यात्मिक और धार्मिक अंतर.

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मासिक शिवरात्रि, सावन शिवरात्रि और फाल्गुन की शिवरात्रि में अतंर (Photo: Pexels)
मासिक शिवरात्रि, सावन शिवरात्रि और फाल्गुन की शिवरात्रि में अतंर (Photo: Pexels)

Maha Shivratri 2026: आज महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन भगवान शिव का माता पार्वती से हुआ था और यह दिन भोलेनाथ के प्राकट्य के रूप में भी मनाया जाता है. महाशिवरात्रि को भगवान शिव की सबसे पवित्र और दिव्य रात्रि माना जाता है. यह पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. इसी महाशिवरात्रि के संदर्भ से जब हम शिवरात्रि शब्द को समझते हैं, तो पता चलता है कि वर्ष भर में आने वाली अन्य शिवरात्रियां भी इसी तिथि पर आधारित हैं, लेकिन उनका महत्व अलग होता है. तो आइए जानते हैं कि मासिक शिवरात्रि, सावन शिवरात्रि और फाल्गुन की शिवरात्रि में क्या अंतर है.

मासिक शिवरात्रि 

पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. यह वर्ष में लगभग 12 बार आती है और इसे भगवान शिव की नियमित उपासना का दिन माना जाता है. ज्योतिषीय दृष्टि से चतुर्दशी तिथि मन और चेतना से जुड़ी होती है, इसलिए इस दिन शिव साधना को मानसिक शांति और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति देने वाला माना गया है. मासिक शिवरात्रि पर भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं, व्रत रखते हैं और ऊं नमः शिवाय मंत्र का जप करते हैं. 

सावन शिवरात्रि

श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस महीने की शिवरात्रि का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने इसी सावन मास में ग्रहण किया था, जिससे उनका नीलकंठ स्वरूप प्रकट हुआ था. सावन शिवरात्रि पर देशभर के प्रमुख शिव जी के मंदिरों जैसे काशी विश्वनाथ मंदिर और बाबा बैद्यनाथ धाम, में विशेष पूजा-अर्चना होती है. कांवड़ यात्रा भी इसी महीने निकाली जाती है. इस दिन विवाह में आ रही बाधाओं की शांति, दांपत्य सुख और संतान प्राप्ति के लिए विशेष प्रार्थनाएं की जाती हैं. 

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फाल्गुन की शिवरात्रि

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली शिवरात्रि को ही महाशिवरात्रि कहा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. कई ग्रंथों में इसे शिव के ज्योतिर्लिंग रूप के प्राकट्य से भी जोड़ा गया है. इस दिन चार प्रहर की पूजा, रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जप किया जाता है. आध्यात्मिक दृष्टि से यह आत्मशुद्धि, तप और मोक्ष की साधना का सबसे शक्तिशाली अवसर माना जाता है. महाशिवरात्रि पर देश-विदेश के मंदिरों में भव्य आयोजन होते हैं और करोड़ों श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते हैं.

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