माता पार्वती ने लंबोदर को सुरक्षा का जिम्मा सौंपा और स्वयं स्नान को चलीं गईं. मां की आज्ञा पाकर बाल गणेश पूरे मनोयोग से भवन की सुरक्षा में जुट गए. इसी समय शिवजी का घर आना हुआ. गणेश ने उन्हें द्वार पर ही रोक लिया. शिव ने उन्हें समझाया. मनाया. मगर वे नहीं मानें. इससे पिता-पुत्र में विवाद बढ़ने लगा और भीषण युद्ध छिड़ गया.