सूर्य का किसी राशि में प्रवेश संक्रांति कहलाता है. जब सूर्य मीन राशि में
प्रवेश करते हैं तो इसे मीन संक्रांति कहा जाता है. मीन राशि बृहस्पति की
जलीय राशि है और इसमें सूर्य का प्रवेश विशेष परिणाम पैदा करता है.
बीमारियाँ और रोग बढ़ते हैं , लोगों के मन में खूब सारी चंचलता आ जाती है. इस समय ज्योतिषीय कारणों से शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं अतः इसे मीन
मलमास (खरमास) भी कहते हैं.
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सूर्य हर 30 दिन यानि एक महीने बाद राशि परिवर्तन करता है. 12 महीनों में यह 12 राशियों पर विचरण करता है और जब यह धनु और मीन राशि पर जाता है, तब उन महीनों को मलमास कहा जाता है. यह अवधि ज्योतिष में शुभ नहीं मानी जाती है.
सूर्य 14 मार्च को मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं. अतः इस बार मीन मलमास 14 मार्च से 14 अप्रैल तक रहेगा.
आइए जानते हैं कि इस समय कौन से कार्य वर्जित होते हैं और क्यों?
इस समय विवाह वर्जित होता है. इस समय अगर विवाह किया जाए तो न तो भावनात्मक सुख मिलेगा और न ही शारीरिक सुख.
नया व्यवसाय या नया कार्य आरम्भ न करें. मीन मलमास में नया व्यवसाय आरम्भ करना आर्थिक मुश्किलों को जन्म देता है.
अन्य मंगल कार्य जैसे द्विरागमन, कर्णवेध, और मुंडन भी वर्जित है क्योंकि इस अवधि के किये गए कार्यों से रिश्तों के ख़राब होने की सम्भावना होती है.
इस समय नए मकान का निर्माण और संपत्ति का क्रय करना वर्जित होता है. इस अवधि
में बनाये गए मकान आम तौर पर कमजोर होते हैं और उनसे निवास का सुख नहीं
मिल पाता
खरमास में कौन से काम कर सकते हैं-
जो कार्य नियमित रूप से हो रहे हों उनको करने में भी खरमास का कोई
बंधन या दबाव नहीं है. सीमान्त, जातकर्म और अन्नप्राशन आदि कर्म पूर्व
निश्चित होने से इस अवधि में किये जा सकते हैं. गया में श्राद्ध भी इस अवधि
में किया जा सकता है , उसकी भी वर्जना नहीं है.
तो पूरे खरमास में कोई भी काम करने से पहले इन बातों का ध्यान जरूर रखिए. फिर ये काला मास भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा.